खूंटी, 2 अक्टूबर 2026 : मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर चार अक्टूबर 2026 को खूंटी में एक बैठक आयोजित की जाएगी। मुंडारी साहित्य परिषद, रांची की ओर से नगर भवन, खूंटी में होने वाली इस बैठक में भाषा के संरक्षण, विकास और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इस बैठक में मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
अलग-अलग जिलों से जुटेंगे साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता
मुंडारी साहित्य परिषद के अनुसार, बैठक में रांची, खूंटी समेत विभिन्न जिलों से मुंडारी भाषा से जुड़े साहित्यकार, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। इस बैठक में भाषा की मौजूदा स्थिति, संरक्षण और इसके विकास के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही मुंडारी को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।
संवैधानिक मान्यता की मांग को लेकर रणनीति पर चर्चा
मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। प्रस्तावित बैठक में इस मांग को लेकर आगे की रणनीति तय करने पर विशेष जोर रहेगा। इस बैठक में भाषा के संरक्षण और संवैधानिक मान्यता की मांग को लेकर भाषाई आंदोलन को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
इस बैठक में मुंडारी साहित्य परिषद के अलावा कई सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें भारत मुंडा समाज, रूम्बुल, मुंडा महासभा, अखिल भारतीय सरना समाज, सरना संगोम समिति, सरना धर्म सोतो: समिति, आदिवासी समन्वय समिति, झारखंड उलगुलान संघ, बकास्त मुंडारी खूंटकट्टी और जोरोंग मुंडा सभा सहित अन्य संगठन शामिल हैं।
मुंडारी भाषा के संरक्षण और विकास पर भी होगा मंथन
इस प्रस्तावित बैठक में सिर्फ आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग ही नहीं, बल्कि मुंडारी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। आयोजकों के मुताबिक बैठक का उद्देश्य मुंडारी भाषा से जुड़े विभिन्न वर्गों और संगठनों को एक मंच पर लाकर आगे की दिशा पर विचार करना है। इस बैठक की जानकारी भीम सिंह मुंडा, सुरजू हस्सा, बिनसाय मुंडा, अलेस्टेयर बोदरा, दामु मुंडा और विनय पूर्ति समेत अन्य लोगों ने दी है।




