रियाद/अंकारा, 15 अगस्त 2026 : तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी शुरू कर दी है। सात अगस्त को हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद तीनों देशों ने उच्चस्तरीय राजनीतिक और सैन्य तंत्र विकसित करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने और रक्षा उद्योग में सहयोग मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है। इस समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह प्रावधान सामूहिक रक्षा की अवधारणा पर आधारित है, जिसे रिपोर्ट में NATO के अनुच्छेद 5 के समान बताया गया है।
तीनों देशों के बीच बनेगा हाई लेवल कॉर्डिनेशन सिस्टम
तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, समझौते के तहत तीनों देशों के बीच सालाना नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। इसके अलावा एक संयुक्त समन्वय समूह बनाया जाएगा, जिसमें विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ-साथ सैन्य नेतृत्व के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसके साथ ही रणनीतिक योजना के लिए एक अलग सचिवालय और संयुक्त सैन्य समिति के तहत एकीकृत कमांड सेल बनाने की योजना है।
जमीन, समुद्र और आसमान में होगा संयुक्त अभ्यास
मक्का समझौते के तहत तीनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। शुरुआती चरण में कमांड-पोस्ट अभ्यास और इसके बाद बड़े स्तर पर बहु-सेवा सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाने की योजना है। इन अभ्यासों में थल सेना, नौसेना, वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम को शामिल किया जा सकता है। ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी संयुक्त अभ्यास का हिस्सा होगा।
हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर जोर
इस साझेदारी का फोकस सिर्फ सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है। तीनों देश रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, अनमैन्ड सिस्टम (UAVs) और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी आधुनिक तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने की योजना है। सऊदी अरब की आर्थिक क्षमता, तुर्की की रक्षा निर्माण क्षमता और पाकिस्तान के सैन्य अनुभव को मिलाकर रक्षा क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।
मिस्र समेत दूसरे देशों को जोड़ने की संभावना
तुर्की की ओर से संकेत दिया गया है कि यह रक्षा सहयोग भविष्य में अन्य देशों तक भी विस्तार कर सकता है। रिपोर्ट में मिस्र समेत दूसरे देशों के संभावित जुड़ाव का उल्लेख किया गया है। अगर इस सहयोग का विस्तार होता है तो पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों का नया नेटवर्क विकसित हो सकता है।
रेड सी की सुरक्षा पर भी बातचीत
तुर्की रेड सी में समुद्री यातायात और शिपिंग की सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में भी अलग से भाग ले रहा है। जेद्दा में इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन को मजबूत करना है।
क्यों अहम है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता ?
मक्का समझौता तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों में सहयोग से तीनों देशों के बीच सैन्य तालमेल बढ़ सकता है। हालांकि, इस समझौते की वास्तविक रणनीतिक और सैन्य प्रभावशीलता आने वाले समय में इस बात पर निर्भर करेगी कि तीनों देश संयुक्त तंत्र, अभ्यास और रक्षा परियोजनाओं को किस स्तर तक लागू करते हैं।




