दमिश्क, 11 अगस्त 2026 : सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल में हुए कथित अत्याचारों और हत्याओं को लेकर अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। एक सीरियाई अदालत ने मंगलवार को पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद, उनके भाई माहेर अल-असद और उनके ममेरे भाई अतीफ नजीब को फांसी की सजा सुनाई। बशर और माहेर देश छोड़कर रूस में हैं, इसलिए दोनों के खिलाफ फैसला उनकी गैरमौजूदगी में सुनाया गया। इस मामले में अतीफ नजीब को मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। उन्हें कैदी की वर्दी में एक पिंजरे के अंदर खड़ा किया गया था। अतीफ को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
अतीफ नजीब पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप
अतीफ नजीब सीरियाई सेना में ब्रिगेडियर जनरल रह चुके हैं। 2011 में वह दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा शाखा के प्रमुख थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। दारा में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद विरोध और ज्यादा उग्र हो गया। देखते ही देखते आंदोलन ने देशव्यापी रूप ले लिया और सीरिया लंबे गृहयुद्ध में फंस गया।
2011 में शुरू हुआ था सीरिया का गृहयुद्ध
सीरिया में गृहयुद्ध की शुरुआत मार्च 2011 में दारा शहर से हुई थी। कुछ स्कूली बच्चों ने सरकार विरोधी नारे लिखे थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार और यातना की खबरों के बाद लोगों में गुस्सा फैल गया। हालांकि शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन सरकार की कार्रवाई के बाद हिंसा बढ़ती चली गई। बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों ने हथियार उठा लिए और देश गृहयुद्ध की चपेट में आ गया। करीब 14 वर्षों तक चले इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और करोड़ों लोग विस्थापित हुए। इस दौरान सीरिया की लड़ाई में कई विदेशी शक्तियां भी अलग-अलग पक्षों के साथ खड़ी रहीं। लाखों लोगों की मौत और करोड़ों लोग
दिसंबर 2024 में खत्म हुआ असद परिवार का शासन
दिसंबर 2024 में विद्रोही गुटों ने दमिश्क पर कब्जा कर बशर अल-असद की सरकार को सत्ता से हटा दिया। इसके साथ ही सीरिया में असद परिवार के करीब 53 वर्षों के शासन का अंत हो गया। सरकार गिरने से पहले बशर अल-असद देश छोड़कर रूस चले गए। उनके भाई माहेर अल-असद भी देश से बाहर चले गए। रूस ने दोनों को शरण दी। इसके बाद विद्रोही नेता अहमद अल-शरा के नेतृत्व में नई सरकार बनी। नई सरकार ने असद शासन के दौरान हुए कथित अत्याचारों और हत्याओं की जांच शुरू की।
रूस और ईरान के समर्थन के बावजूद कैसे गिरी असद सरकार ?
गृहयुद्ध के दौरान बशर अल-असद को रूस, ईरान और हिजबुल्लाह का महत्वपूर्ण समर्थन मिला था। इस समर्थन के कारण उनकी सरकार लंबे समय तक सत्ता में बनी रही। हालांकि, 2024 में क्षेत्रीय हालात तेजी से बदले। इजराइल के हमलों से ईरान समर्थित गुट और हिजबुल्लाह कमजोर हुए, जबकि रूस यूक्रेन युद्ध में व्यस्त था। ऐसे समय में विद्रोही गुटों ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया से बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। विद्रोहियों ने तेजी से कई इलाकों पर कब्जा किया और दिसंबर 2024 में दमिश्क तक पहुंच गए। इसके बाद बशर अल-असद को देश छोड़कर रूस जाना पड़ा।
असद के खिलाफ यह पहला बड़ा आपराधिक फैसला
बशर अल-असद के खिलाफ यह फैसला उनके शासनकाल के दौरान हुई कथित हत्याओं और अत्याचारों की जांच के बाद आया है। अदालत ने बशर अल-असद, माहेर अल-असद और अतीफ नजीब को मामले में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद सीरिया में लंबे समय तक चले असद शासन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर जवाबदेही की प्रक्रिया को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।




