मॉस्को/वॉशिंगटन, 8 अगस्त 2026 : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी खुफिया आकलनों ने यूरोप की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर रूस को यूक्रेन युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता है, तो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन NATO के साथ तनाव बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस सीधे बड़े सैन्य हमले के बजाय साइबर अटैक या सीमित स्तर की घुसपैठ जैसे कदमों के जरिए NATO की एकता और उसके सामूहिक रक्षा तंत्र की परीक्षा ले सकता है।

NATO देश पर हमले की आशंका

अमेरिकी खुफिया आकलन में यह संभावना जताई गई है कि रूस आने वाले समय में किसी NATO सदस्य देश के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, पुतिन ऐसा कब कर सकते हैं, इसे लेकर कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। अमेरिकी और NATO अधिकारियों के मुताबिक, अगर रूस को यूक्रेन संघर्ष से बाहर निकलने का ऐसा रास्ता नहीं मिलता जिसे वह सम्मानजनक मानता हो, तो मॉस्को पश्चिमी सैन्य गठबंधन के साथ तनाव बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर सकता है। कुछ आकलनों में बाल्टिक देशों या पोलैंड को संभावित संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर देखा गया है। हालांकि, यह अभी एक संभावित परिदृश्य है और किसी आगामी रूसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

साइबर अटैक से लेकर सीमित घुसपैठ तक की आशंका

रिपोर्ट के अनुसार, रूस के संभावित कदमों में साइबर हमले, हाइब्रिड गतिविधियां या सीमित स्तर पर सैन्य घुसपैठ शामिल हो सकती है। ऐसे कदमों का उद्देश्य NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था की प्रतिक्रिया को परखना हो सकता है। NATO का आर्टिकल 5 किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमले को पूरे गठबंधन के खिलाफ हमला मानने के सिद्धांत पर आधारित है। ऐसे में किसी NATO सदस्य पर हमला व्यापक सैन्य टकराव का खतरा पैदा कर सकता है।

NATO ने कहा- हर स्थिति के लिए तैयार

NATO के वरिष्ठ सैन्य प्रवक्ता मार्टिन ओडोनेल ने खुफिया आकलनों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन अलग-अलग संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लगातार तैयारी करता है। NATO फिलहाल रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित हमले को रोकने तथा जरूरत पड़ने पर अपने सदस्य देशों की रक्षा करने के लिए तैयार रहने की बात कहता रहा है।

यूरोप में रूसी ड्रोन को लेकर भी चिंता

हाल के दिनों में जर्मनी समेत यूरोप के कुछ हिस्सों में कथित रूसी ड्रोन गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है। जर्मनी के अधिकारियों ने ड्रोन को संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में देखा है। जर्मन अधिकारियों के मुताबिक, हवाई अड्डों और संवेदनशील स्थानों के आसपास विस्फोटक से लैस ड्रोन जैसी घटनाएं नई चुनौती पैदा कर सकती हैं। हालांकि, ऐसी घटनाओं को किसी विशेष देश से जोड़ने से पहले जांच जरूरी है।

अमेरिका के हथियार भंडार पर भी सवाल

रूस से जुड़े इन आकलनों के बीच अमेरिका के हथियार भंडार को लेकर भी चर्चा तेज है। लंबी दूरी की मिसाइलों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के भंडार पर दबाव को लेकर रिपोर्टें सामने आती रही हैं।ऐसे समय में रूस और NATO के बीच किसी नए सैन्य टकराव की आशंका अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

क्या NATO और रूस के बीच सीधा टकराव संभव है ?

फिलहाल NATO और रूस के बीच सीधे युद्ध की कोई पुष्टि नहीं है। अमेरिकी खुफिया आकलन भविष्य की संभावित परिस्थितियों को लेकर चेतावनी देते हैं। यूक्रेन युद्ध के बीच साइबर हमले, ड्रोन गतिविधियां व हाइब्रिड युद्ध जैसे खतरे पहले से ही यूरोप की सुरक्षा नीति का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।