इस्लामाबाद, 14 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की सेना के खिलाफ आवाज और तेज हो गई है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने PoK से पाकिस्तानी सेना को हटाने की जोरदार मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में 13 अगस्त 1948 के संयुक्त राष्ट्र आयोग (UNCIP) के प्रस्ताव का हवाला दिया है।

PoK में सेना हटाने की मांग क्यों उठी ?

PoK में पिछले दो महीने से ज्यादा समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत में प्रदर्शनकारी महंगाई, संसाधनों के इस्तेमाल और विधानसभा में सीटों के आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। अब आंदोलन में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल हो गया है। रावलकोट में एक सभा को संबोधित करते हुए JAAC के नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तानी सेना से PoK छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार और सेना को यह बताना चाहिए कि क्षेत्र से सेना हटाने की उनकी समय-सीमा क्या है। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान सेना के एक्शन को गलत बताया।

1948 के UN प्रस्ताव का दिया हवाला

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में 1948 के संयुक्त राष्ट्र आयोग के प्रस्ताव का जिक्र किया। अमान खान के मुताबिक, 13 अगस्त 1948 के UNCIP प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर से संबंधित शर्तों का उल्लेख किया गया था और पाकिस्तान से अपने सैनिकों और नागरिकों को हटाने की बात कही गई थी।JAAC नेता ने सवाल उठाया कि प्रस्ताव को करीब आठ दशक बीत जाने के बाद भी पाकिस्तानी सेना PoK में क्यों मौजूद है। इसलिए अब पाकिस्तान की सेना को हर हाल में PoK छोड़ना होगा।

68 दिनों से जारी है विरोध प्रदर्शन

रिपोर्ट के मुताबिक PoK के कई इलाकों में करीब 68 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। महंगाई, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों से शुरू हुआ आंदोलन अब व्यापक राजनीतिक मांगों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का भी विरोध कर रहे हैं। JAAC इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही है।

असीम मुनीर और शहबाज सरकार के लिए चुनौती

PoK में सेना हटाने की मांग ऐसे समय उठी है जब क्षेत्र में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों का सेना की मौजूदगी को लेकर खुलकर विरोध करना पाकिस्तान की सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर के लिए राजनीतिक और सुरक्षा चुनौती बढ़ा सकता है। हालांकि, PoK की स्थिति और 1948 के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव की कानूनी एवं ऐतिहासिक व्याख्या को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे रहे हैं। इसलिए प्रदर्शनकारियों के दावे को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।