इस्लामाबाद, 8 अगस्त 2026: पाकिस्तान में गरीबी और महंगाई का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर लगातार बढ़ता जा रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश की करीब 63 फीसदी आबादी यानी लगभग 16.1 करोड़ लोग स्वस्थ और पौष्टिक भोजन की न्यूनतम जरूरत पूरी करने का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आवास, परिवहन, बिजली और पानी जैसे जरूरी गैर-खाद्य खर्चों के बाद बड़ी आबादी के पास अनाज, दाल, दूध, अंडे, फल और सब्जियां जैसे पोषक खाद्य पदार्थ खरीदने के लिए पर्याप्त आय नहीं बचती।

दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की स्थिति चिंताजनक

'द न्यूज' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में पाकिस्तान की करीब दो-तिहाई आबादी न्यूनतम स्वस्थ आहार का खर्च उठाने में असमर्थ रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कीमत अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद पाकिस्तान में स्वस्थ भोजन तक लोगों की पहुंच बेहद कमजोर है। इस स्थिति के पीछे महंगाई, वास्तविक आय में गिरावट और लोगों की घटती क्रय शक्ति को प्रमुख कारण माना गया है।

महंगाई कम हुई, लेकिन लोगों की मुश्किल नहीं

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में खाद्य महंगाई 2023 के उच्च स्तर से नीचे आई है, लेकिन इससे आम लोगों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। महंगाई को समायोजित करने के बाद वास्तविक घरेलू आय में करीब 13 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, गरीबी दर 21.9 फीसदी से बढ़कर 28.9 फीसदी हो गई। इसके चलते अनुमानित 2.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे पहुंच गए।

लोगों की थाली से कम हुए जरूरी खाद्य पदार्थ

आर्थिक संकट का असर लोगों के खानपान पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में दो सर्वेक्षणों के बीच 14 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 13 की प्रति व्यक्ति खपत में गिरावट का उल्लेख किया गया है।

आंकड़ों के मुताबिक :

  • चावल की प्रति व्यक्ति मासिक खपत में करीब 19 फीसदी कमी आई।
  • दालों की खपत करीब 26 फीसदी घटी।
  • दूध की खपत में करीब 10 फीसदी गिरावट दर्ज हुई।
  • मटन, बीफ और चिकन की संयुक्त खपत करीब 18 फीसदी कम हुई।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बढ़ती कीमतों और कम आय के कारण परिवारों को अपने भोजन के बजट में कटौती करनी पड़ रही है।

वैश्विक स्तर पर भूख की स्थिति में मामूली सुधार

रिपोर्ट में वैश्विक खाद्य संकट के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2025 में दुनिया की करीब 7.8 फीसदी आबादी भूख से प्रभावित रही। यह आंकड़ा 2024 में 8.1 फीसदी और 2022 में 8.6 फीसदी था। हालांकि, पाकिस्तान में खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने के बावजूद लोगों की खरीद क्षमता में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले की ऊंची महंगाई ने घरेलू आय और परिवारों के बजट पर जो दबाव डाला, उसका असर अभी भी बना हुआ है।

आर्थिक संकट का सीधा असर खाने की थाली पर

पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी, कमजोर क्रय शक्ति और महंगाई का असर अब केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव लोगों के भोजन की गुणवत्ता और खपत पर भी पड़ रहा है।चावल, दाल, दूध और मांस जैसे जरूरी खाद्य पदार्थों की खपत में गिरावट इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में परिवार पौष्टिक भोजन के बजाय अपने सीमित बजट में जरूरी जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हैं।