वॉशिंगटन, 8 अगस्त 2026: इंसानी दिमाग के विकास को लेकर लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि मांस और उससे मिलने वाले प्रोटीन व वसा ने अहम भूमिका निभाई। हालांकि, एक नई रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती देते हुए कहा है कि इंसानी दिमाग के विकास में शुगर और कार्बोहाइड्रेट भी महत्वपूर्ण रहे होंगे। वैज्ञानिकों ने इंसानी विकास के अलग-अलग चरणों में भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों और दिमाग की ऊर्जा जरूरतों का मॉडल तैयार किया। रिसर्च के मुताबिक, फल और शहद से मिलने वाला ग्लूकोज तथा बाद में पकाए गए स्टार्च से मिलने वाला ग्लूकोज हमारे पूर्वजों के बढ़ते दिमाग की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार रहा होगा।

दिमाग को क्यों चाहिए था ज्यादा ग्लूकोज ?

इंसानी दिमाग शरीर का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होने के बावजूद काफी ऊर्जा खर्च करता है। एक वयस्क में दिमाग शरीर के वजन का करीब 2 फीसदी होता है, लेकिन बेसल मेटाबोलिक ऊर्जा का लगभग 20 फीसदी इस्तेमाल करता है। बच्चों में ऊर्जा की यह जरूरत और अधिक हो सकती है।रिसर्चर्स के मुताबिक, दिमाग मुख्य रूप से ग्लूकोज का इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत के रूप में करता है। ऐसे में जैसे-जैसे मानव पूर्वजों का दिमाग बड़ा और अधिक जटिल होता गया, वैसे-वैसे लगातार ऊर्जा उपलब्ध कराने वाले खाद्य स्रोतों की जरूरत भी बढ़ी।

क्या सिर्फ मांस से पूरी हो सकती थी दिमाग की जरूरत ?

नई स्टडी का सबसे अहम निष्कर्ष यही है कि केवल मांस को इंसानी दिमाग के विकास का प्रमुख कारण मानना पर्याप्त नहीं हो सकता। रिसर्चर्स का कहना है कि खासकर आग पर नियंत्रण और खाना पकाने की तकनीक विकसित होने से पहले लगातार ग्लूकोज हासिल करना केवल पशु-आधारित भोजन से मुश्किल रहा होगा। इसलिए फल, शहद और अन्य कार्बोहाइड्रेट स्रोतों ने भी मानव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी। बाद के दौर में स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों को पकाने से शरीर के लिए उपलब्ध ग्लूकोज की मात्रा और बढ़ी होगी।

रिसर्चर्स ने कैसे तैयार किया मॉडल ?

शोधकर्ताओं ने होमिनिन विकास के अलग-अलग चरणों में भोजन और ऊर्जा की जरूरतों की तुलना करने वाला मॉडल तैयार किया। इसमें भोजन में पशु और पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों के अनुपात को अलग-अलग चरणों में देखा गया। इसके लिए फॉसिल आइसोटोप अनुपात, दांतों की बनावट और जेनेटिक डेटा सहित कई वैज्ञानिक संकेतकों का इस्तेमाल किया गया। मॉडल की शुरुआत चिंपैंजी जैसे खान-पान से हुई और इसे आधुनिक शिकारी-संग्रहकर्ता समुदायों के आहार पैटर्न तक विकसित किया गया।

मांस की भूमिका को पूरी तरह खारिज नहीं करती स्टडी

रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि मांस और प्रोटीन का इंसानी विकास में कोई योगदान नहीं था। बल्कि अध्ययन यह बताता है कि मानव दिमाग के विकास को समझने के लिए सिर्फ मांस और प्रोटीन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इंसानी विकास के दौरान कार्बोहाइड्रेट, शुगर और स्टार्च से मिलने वाली ऊर्जा ने भी बढ़ते दिमाग की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई होगी।

क्या बदल सकती है इंसानी विकास की समझ ?

यह अध्ययन मानव विकास और खान-पान के बीच संबंध को देखने का नजरिया बदल सकता है। अब तक मानव दिमाग के विकास की चर्चा में अक्सर मांस और उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन को प्रमुखता दी जाती रही है। नई रिसर्च इस चर्चा में शुगर और स्टार्च को भी महत्वपूर्ण स्थान देती है। हालांकि, शोधकर्ताओं के निष्कर्ष मानव विकास के जटिल इतिहास को समझने की दिशा में एक वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें इंसानी आहार के लिए किसी एक खाद्य समूह को अनिवार्य बताने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।