वॉशिंगटन, 14 अगस्त 2026 : भारत की साख और इसके बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव का डंका दुनियाभर में बज रहा है। इस बीच एक सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है। प्यू रिसर्च सेंटर के 36 देशों में किए गए सर्वे में भारत की वैश्विक छवि को लेकर अलग-अलग तस्वीर सामने आई है। औसतन 45% लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 41% की राय नकारात्मक रही। पड़ोसी देशों में श्रीलंका में भारत को लेकर सबसे सकारात्मक राय दिखी, जबकि पाकिस्तान में यह आंकड़ा सिर्फ 7% रहा।
भारत की वैश्विक छवि और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को लेकर प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। 36 देशों में किए गए इस सर्वे के मुताबिक, भारत को लेकर दुनिया की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है। कुछ देशों में भारत के प्रति सकारात्मक नजरिया मजबूत है, जबकि कुछ देशों में नकारात्मक राय देखने को मिली है। सर्वे के अनुसार, शामिल देशों में औसतन 45% लोगों की भारत के प्रति सकारात्मक राय है, जबकि 41% लोगों की राय नकारात्मक है। वहीं कई देशों में लोगों ने भारत के बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं जताई है।
श्रीलंका में भारत को लेकर सबसे मजबूत सकारात्मक राय
भारत के पड़ोसी देशों के आंकड़े खास तौर पर चर्चा में हैं। सर्वे के मुताबिक श्रीलंका में 79% लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई। यह सर्वे में भारत के लिए सबसे मजबूत सकारात्मक आंकड़ों में शामिल है। इसके विपरीत पाकिस्तान में भारत को लेकर सकारात्मक राय रखने वाले लोगों की संख्या बेहद कम रही। यहां सिर्फ 7% लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक नजरिया जताया। इस तरह भारत को लेकर श्रीलंका और पाकिस्तान की जनमत राय में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
केन्या और ब्रिटेन में भी भारत की अच्छी छवि
सर्वे के मुताबिक श्रीलंका के अलावा केन्या और यूनाइटेड किंगडम में भी भारत को लेकर सकारात्मक राय काफी मजबूत है। दोनों देशों में करीब 10 में सात लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक नजरिया जताया। इसके अलावा जर्मनी, इजरायल, इटली, स्वीडन, जापान और थाईलैंड जैसे देशों में भी भारत को लेकर सकारात्मक राय रखने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही।
तुर्की में सिर्फ 15% लोगों की राय सकारात्मक
तुर्की में भारत की लोकप्रियता का आंकड़ा काफी कम रहा। सर्वे के मुताबिक वहां सिर्फ 15% लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम में भारत को लेकर सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या कम रही और यह आंकड़ा 18% बताया गया है। हालांकि, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कई देशों में भारत को लेकर राय मिली-जुली रही। कुछ देशों में बड़ी संख्या में लोगों ने भारत के बारे में अपनी राय व्यक्त नहीं की।
अमेरिका में भारत को लेकर सकारात्मक राय में गिरावट
अमेरिका के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। सर्वे के अनुसार अमेरिका में 45% वयस्कों की भारत के प्रति सकारात्मक राय है, जबकि 50% लोगों की राय नकारात्मक रही। रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत को लेकर सकारात्मक राय रखने वाले अमेरिकियों का आंकड़ा 51% था। इसके बाद इसमें गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका में भारत को लेकर राय राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भी अलग दिखाई देती है। डेमोक्रेटिक समर्थकों में भारत के प्रति सकारात्मक राय रिपब्लिकन समर्थकों की तुलना में अधिक रही।
भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी सवाल
सर्वे में लोगों से भारत के वैश्विक प्रभाव को लेकर भी सवाल किया गया। अमेरिका में 54% लोगों का मानना था कि भारत का वैश्विक प्रभाव लगभग पहले जैसा ही है। वहीं 30% लोगों ने कहा कि भारत का प्रभाव बढ़ा है, जबकि 13% लोगों के मुताबिक भारत का प्रभाव कमजोर हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को लेकर अलग-अलग देशों और समूहों में अलग धारणा बनी हुई है।
यूरोप में भारत की छवि में सुधार
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि कुछ यूरोपीय देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत को लेकर सकारात्मक राय में बढ़ोतरी हुई है। यूके में 2025 के मुकाबले भारत के प्रति सकारात्मक राय में 11 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी बताई गई है। वहीं जर्मनी में छह प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है। श्रीलंका में भी 2024 के बाद भारत को लेकर सकारात्मक राय में 14 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जर्मनी में 2023 में 47% लोगों ने भारत के प्रति सकारात्मक राय जताई थी, जबकि मौजूदा सर्वे में यह आंकड़ा बढ़कर 63% बताया गया है। फ्रांस में भी 2023 के 39% के मुकाबले भारत के प्रति सकारात्मक राय बढ़कर 50% हुई है।
भारत की वैश्विक छवि की तस्वीर कितनी बदली ?
36 देशों के इस सर्वे से साफ है कि भारत की वैश्विक छवि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नजर आती है। जहां श्रीलंका, केन्या और ब्रिटेन जैसे देशों में भारत को लेकर मजबूत सकारात्मक राय देखने को मिली, वहीं पाकिस्तान और तुर्की में तस्वीर इसके उलट रही। कुल मिलाकर सर्वे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि में मौजूद क्षेत्रीय और राजनीतिक अंतर को सामने रखता है। इसके साथ ही कुछ देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत के प्रति सकारात्मक राय बढ़ने के संकेत भी देता है।




