इस्लामाबाद, 14 अगस्त 2026 : भारत के चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब पाकिस्तान भी चंद्रमा पर रोवर भेजने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान का पहला लूनर रोवर ‘जिन्ना-1’ साल 2029 में चीन के सहयोग से चांद पर भेजा जाएगा। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास वैज्ञानिक शोध पर केंद्रित होगा। पाकिस्तान ने चंद्रमा पर अपना पहला रोवर भेजने की योजना का ऐलान किया है। ‘जिन्ना-1’ नाम का यह रोवर चीन के Chang’e-8 मिशन के साथ चांद तक पहुंचेगा। पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO के मुताबिक, मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह, उसकी भूगर्भीय संरचना और दक्षिणी ध्रुव के आसपास के क्षेत्र का अध्ययन करना है।

चीन के मिशन के साथ चांद पर जाएगा ‘जिन्ना-1’

प्रस्तावित मिशन को चीन के सहयोग से साल 2029 में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में चीन रॉकेट और मुख्य लैंडर उपलब्ध कराएगा। पाकिस्तान का रोवर इसी लैंडर के जरिए चंद्रमा की सतह तक पहुंचेगा। चीन के Chang’e-8 मिशन में विभिन्न देशों के पेलोड के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। इसी व्यवस्था के तहत पाकिस्तान का करीब 35 किलोग्राम वजन वाला ‘जिन्ना-1’ रोवर चंद्रमा तक भेजे जाने की योजना है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर होगी रिसर्च

‘जिन्ना-1’ का मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास वैज्ञानिक अध्ययन करना होगा। यह क्षेत्र दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कई ऐसे इलाके हैं जहां लंबे समय तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती। वैज्ञानिकों को यहां बर्फ के रूप में पानी मौजूद होने की संभावना भी मिली है। भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन और स्थायी बेस की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जाता है।

चंद्रमा की सतह और भूगर्भीय संरचना का करेगा अध्ययन

SUPARCO के अनुसार, ‘जिन्ना-1’ चंद्रमा की सतह की जियोलॉजी का अध्ययन करेगा। रोवर अलग-अलग वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए चंद्रमा की संरचना और वहां मौजूद परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी जुटाएगा। मिशन से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल भविष्य में चंद्रमा पर होने वाले वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जा सकता है।

4 हजार नामों में से चुना गया ‘जिन्ना-1’

पाकिस्तान ने अपने लूनर रोवर का नाम रखने के लिए देशभर में प्रतियोगिता आयोजित की थी। SUPARCO के मुताबिक, प्रतियोगिता में करीब 4,000 सुझाव मिले थे। इनमें से ‘जिन्ना-1’ नाम को चुना गया। यह नाम सात लोगों ने सुझाया था और विजेता का चयन लकी ड्रॉ के जरिए किया गया।SUPARCO के अनुसार, बहावलनगर के 17 वर्षीय तैयब करीम को ‘जिन्ना-1’ नाम सुझाने के लिए विजेता घोषित किया गया।

भारत पहले ही कर चुका है दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग

पाकिस्तान का यह मिशन ऐसे समय में सामने आया है जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर चुका है। भारत के चंद्रयान-3 ने अगस्त 2023 में चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग की थी। इसके साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना था। चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर ने चंद्रमा की सतह पर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और महत्वपूर्ण डेटा जुटाया।

चीन-पाकिस्तान का बढ़ता अंतरिक्ष सहयोग

पाकिस्तान और चीन के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। SUPARCO और चीन की अंतरिक्ष एजेंसी CNSA के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग के तहत कई परियोजनाओं पर काम हो रहा है। अब ‘जिन्ना-1’ मिशन इसी साझेदारी का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है। हालांकि, इस मिशन में पाकिस्तान का रोवर चीन के लॉन्च और लैंडिंग सिस्टम पर निर्भर रहेगा।

2029 में चांद पर पहुंचेगा पाकिस्तान ?

अगर योजना के मुताबिक मिशन लॉन्च होता है, तो 2029 में पाकिस्तान का ‘जिन्ना-1’ चंद्रमा की सतह पर पहुंच सकता है। इसके जरिए पाकिस्तान पहली बार अपने रोवर के माध्यम से चंद्रमा पर वैज्ञानिक प्रयोग करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। यानी भारत के चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पाकिस्तान भी चंद्रमा की वैज्ञानिक दौड़ में शामिल होने की तैयारी कर रहा है, हालांकि उसके मिशन में चीन की अहम भूमिका होगी।