इस्लामाबाद, 15 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान से जुड़ी एक रिपोर्ट में ISI और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के बीच कथित हाई-लेवल बैठक का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बैठक 14 अप्रैल को ‘जिहाद-उर-पाकिस्तान’ के बैनर तले आयोजित की गई थी, जिसमें आतंकी कमांडरों, पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों, धार्मिक नेताओं, छात्र संगठनों और स्थानीय कारोबारियों समेत 300 से 350 लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैठक का कथित उद्देश्य बलूचिस्तान में बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन का मुकाबला करने के लिए रणनीति तैयार करना और भारत के खिलाफ संभावित आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क मजबूत करना था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ISI-LeT की कथित बैठक में कौन-कौन हुआ शामिल ?

रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में अलग-अलग समूहों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के करीब 25 अधिकारी-कर्मचारी, लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा से जुड़े करीब 50 कथित वरिष्ठ कैडर और कमांडर शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा छात्र संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों और क्वेटा के स्थानीय कारोबारियों की मौजूदगी का भी दावा किया गया है।

बलूच आंदोलन के खिलाफ रणनीति का दावा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य बलूचिस्तान में सक्रिय राष्ट्रवादी और विद्रोही संगठनों के खिलाफ नया नेटवर्क तैयार करना था। रिपोर्ट के मुताबिक, ISI से जुड़े एक अधिकारी ने क्षेत्र के अलग-अलग जिलों में कथित भर्ती अभियान की बात कही। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसमें बताए गए किसी भी कथित ऑपरेशनल प्लान को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।

LeT की कथित घुसपैठ की योजना ?

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के कुछ कथित ऑपरेटिव्स को बलूच राष्ट्रवादी संगठनों में घुसपैठ कराने की योजना बनाई गई थी। दावे के अनुसार, इसका उद्देश्य इन संगठनों की गतिविधियों और नेतृत्व से जुड़ी जानकारी हासिल करना तथा उनके नेटवर्क को कमजोर करना था। रिपोर्ट में BLA, BLF, BRAS और मजीद ब्रिगेड जैसे संगठनों का नाम लिया गया है।

भर्ती और ट्रेनिंग को लेकर भी बड़ा दावा

रिपोर्ट में कथित तौर पर नए लोगों की भर्ती और ट्रेनिंग से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें क्वेटा को प्रशिक्षण गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने और बलूचिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट में किए गए दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

भारत के खिलाफ साजिश का कितना बड़ा दावा ?

रिपोर्ट का सबसे गंभीर दावा भारत से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि कथित बैठक में भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नेटवर्क तैयार करने पर भी चर्चा हुई। अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और खुफिया तंत्र के बीच कथित तालमेल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर इस कथित योजना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।