इस्लामाबाद, 17 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सेना और बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। BLA ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले आठ दिनों में 22 हमले किए, जिनमें 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बलूचिस्तान में BLA के ताबड़तोड़ हमले

BLA ने सोमवार को जारी बयान में दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। संगठन के मुताबिक, कलात और सूरब में IED हमलों में सुरक्षाकर्मियों को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा चगाई, खारन व पंजगुर में पुलिस एवं सुरक्षा ठिकानों पर भी हमले किए गए। BLA ने नुश्की, तुरबत और क्वेटा में हुई कई हिंसक घटनाओं की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। संगठन के अनुसार, पाकिस्तानी सेना से जुड़ी नौ गाड़ियों को निशाना बनाया गया। रेलवे ट्रैक व अन्य ढांचे पर हमलों का भी दावा किया गया है।

असीम मुनीर के लिए क्यों बढ़ी चुनौती ?

बलूचिस्तान में लगातार हो रही हिंसा पाकिस्तान की सेना और सरकार के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर के सामने एक तरफ आतंकवाद और दूसरी तरफ बलूच अलगाववादी संगठनों से निपटने की चुनौती है। BLA लंबे समय से पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है। संगठन बलूचिस्तान में राजनीतिक अधिकारों और संसाधनों को लेकर अपनी मांगें उठाता रहा है। पाकिस्तान सरकार और सेना BLA को एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन के तौर पर देखती है।

आठ दिन में 22 हमलों का दावा

BLA का कहना है कि उसके हालिया अभियान में आठ दिनों के दौरान कुल 22 हमले किए गए। इनमें सुरक्षा चौकियों, सैन्य ठिकानों, वाहनों और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने का दावा किया गया है। संगठन ने दावा किया कि इन अभियानों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या विस्तृत आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं।

एयर स्ट्राइक के बाद बढ़ी थी हिंसा

BLA ने अपने हालिया हमलों को सूरब इलाके में पाकिस्तानी एयरफोर्स की कथित एयरस्ट्राइक से भी जोड़ा है। स्थानीय संगठनों ने इस कार्रवाई में आम नागरिकों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया था। इसके बाद बलूचिस्तान के कई हिस्सों में सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों के खिलाफ हमलों में तेजी देखने को मिली। हालांकि, अलग-अलग पक्षों के दावों के कारण घटनाओं में हताहतों की वास्तविक संख्या को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

बलूचिस्तान में पहले भी निशाने पर रहे सरकारी अधिकारी

बलूचिस्तान में हिंसा का दायरा सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा है। हाल ही में मस्तुंग इलाके में प्रांतीय गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लांगगो की गाड़ी को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। इस घटना में उनके सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए थे। पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में दशकों से अलगाववादी आंदोलन और सुरक्षा बलों के बीच तनाव जारी है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध इस क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संसाधनों पर अधिकार और विकास को लेकर भी लंबे समय से विवाद रहा है।