काहिरा, 17 अगस्त 2026 : मिस्र में पुरातत्वविदों को एक ऐसी खोज मिली है, जिसने हजारों साल पुराने एक रहस्य को फिर से चर्चा में ला दिया है। स्वेज नहर के पास टेल अबू सेफी में मिले प्राचीन बलुआ पत्थर के शिलालेख से इस बात के मजबूत संकेत मिले हैं कि यह जगह प्राचीन मिस्र के खोए हुए शहर ‘मसन’ (Masn) से जुड़ी हो सकती है। ‘मसन’ का उल्लेख 3,000 साल से भी पुराने ऐतिहासिक लेखों में मिलता है, पर लंबे समय से इसके वास्तविक स्थान को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्वविदों में मतभेद रहा है। अब मिले नए शिलालेख ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

स्वेज नहर के पास मिला बड़ा सबूत

मिस्र की पुरातत्व टीम को इस्माइलिया प्रांत में कंतारा ईस्ट के पास स्थित टेल अबू सेफी में एक बड़े बलुआ पत्थर के लिंटेल का हिस्सा मिला। यह पत्थर दो हिस्सों में टूटा हुआ है और इसकी तीन सतहों पर प्राचीन मिस्र की लिपि में शिलालेख दर्ज हैं। इन शिलालेखों में फराओ रामसेस द्वितीय की शाही उपाधियों का उल्लेख मिलता है। साथ ही मसन शहर से जुड़े संकेत भी पाए गए हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज टेल अबू सेफी को प्राचीन मसन से जोड़ने वाली परिकल्पना को मजबूत करती है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मसन की पहचान की अंतिम पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके लिए आगे और खुदाई तथा वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होगी।

कौन थे रामसेस द्वितीय ?

रामसेस द्वितीय प्राचीन मिस्र के सबसे प्रभावशाली फराओ में गिने जाते हैं। उन्होंने 13वीं सदी ईसा पूर्व में करीब छह दशक तक मिस्र पर शासन किया था। नए मिले शिलालेख में एक मंदिर या मूर्ति के जीर्णोद्धार से जुड़ी जानकारी का भी संकेत मिलता है। इसमें होरस का उल्लेख है, जिन्हें प्राचीन मिस्र में महत्वपूर्ण देवता माना जाता था और मसन से उनका विशेष संबंध बताया जाता है।

1887 से चली आ रही थी मसन की खोज

मसन शहर की पहचान को लेकर बहस करीब 140 साल से चली आ रही है। वर्ष 1887 में टेल अबू सेफी इलाके से ऐसे पत्थर मिले थे, जिन पर रामसेस द्वितीय और मेसेन के होरस से जुड़े उल्लेख पाए गए थे। बाद की कुछ रिसर्च में इस संभावना पर सवाल उठे कि ये पत्थर कहीं और से लाकर यहां रखे गए हो सकते हैं। ऐसे में हालिया शिलालेख को इस पुरानी बहस में अहम नया सबूत माना जा रहा है।

खुदाई में मंदिर और प्राचीन सड़कें भी मिलीं

पुरातत्वविदों को टेल अबू सेफी में एक बड़े मंदिर परिसर के अवशेष भी मिले हैं। पहले मिट्टी की ईंटों से बनी विशाल दीवार को मंदिर का हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरे मंदिर परिसर को घेरने वाली संरचना थी। खुदाई के दौरान मंदिर की ओर जाने वाली दो पत्थर की सड़कें मिली हैं। इनमें से एक सड़क टॉलेमिक काल की बताई जा रही है, जबकि दूसरी सड़क रोमन शासन के दौर में बनाई गई थी। परिसर के भीतर स्टोरेज रूम, सर्विस रूम और मंदिर के सबसे पवित्र हिस्से के अवशेष भी मिले हैं।

2500 साल पुरानी मूर्तियों ने बढ़ाया रोमांच

इस स्थल से करीब 2,500 साल पुरानी मूर्तियों के अवशेष भी मिले हैं। इनमें एक सैन्य अधिकारी की प्रतिमा का हिस्सा शामिल है, जिसमें वह एक छोटे मंदिर को पकड़े हुए दिखाई देता है। इसके अलावा बिना सिर और पैरों वाली एक मूर्ति, बेसाल्ट से बना राजा का धड़ और बाज की मूर्तियों के टुकड़े भी मिले हैं। अगर आगे की खुदाई में यह साबित हो जाता है कि टेल अबू सेफी ही प्राचीन मसन शहर था, तो इससे मिस्र की पूर्वी सीमा, सैन्य व्यवस्था और प्राचीन व्यापार मार्गों के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।