दुबई/तेहरान, 5 अगस्त 2026।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली पोर्ट के पास हुए धमाकों और लाल सागर में भारतीय जहाज पर हुए हमले के बाद मध्य-पूर्व में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और क्षेत्रीय दावों में यमन के हूती विद्रोहियों की भूमिका की बात कही जा रही है, जबकि कुछ विश्लेषणों में ईरान पर प्रॉक्सी समूहों के जरिए हमले कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, ईरान की प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
जेबेल अली पोर्ट के पास हुए धमाके
बुधवार को दुबई के औद्योगिक क्षेत्र जेबेल अली में कई धमाकों की खबर सामने आई। घटना के बाद इलाके में धुएं का गुबार देखा गया और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि हमले में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल हुआ, लेकिन यूएई सरकार ने अभी तक हमले के कारण या जिम्मेदार पक्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
हूती विद्रोहियों पर संदेह
क्षेत्रीय मीडिया और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यमन में सक्रिय हूती विद्रोही इस घटना के पीछे हो सकते हैं। हूती संगठन पहले भी लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों तथा रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। हालांकि, इस घटना की जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने आधिकारिक तौर पर नहीं ली है।
भारतीय जहाज पर भी हमला
इसी दौरान लाल सागर से गुजर रहे भारतीय ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर भी हमला हुआ। जहाज पर कुल 14 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 13 भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले के बाद सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस घटना के लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है।
ईरान की भूमिका पर क्या है स्थिति ?
कुछ विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों में हूती विद्रोहियों को ईरान समर्थित समूह बताया गया है और इन्हीं आधारों पर ईरान की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जेबेल अली धमाकों या भारतीय जहाज पर हुए हमले में ईरान की प्रत्यक्ष संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता
इन घटनाओं के बाद लाल सागर, अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सुरक्षा एजेंसियां घटनाक्रम की जांच कर रही हैं और क्षेत्र की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।




