वॉशिंगटन/इस्लामाबाद, 12 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा खर्च के बीच अमेरिका ने इस्लामाबाद की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की 2026 फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में सैन्य और खुफिया खर्च की पर्याप्त संसदीय और नागरिक निगरानी नहीं होने की बात कही गई है। रिपोर्ट में पाकिस्तान से रक्षा और सरकारी खर्च से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर कई सुधार करने को कहा गया है। इस तरह अमेरिका ने सैन्य खर्च को लेकर पाकिस्तान को घेर लिया है। अमेरिका ने कहा है कि पाकिस्तान को अपने खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।
3 ट्रिलियन के सैन्य खर्च पर क्यों घिरा पाकिस्तान ?
पाकिस्तान ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा सेवाओं के मद में करीब 3 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का प्रावधान किया है। यह पिछले साल के शुरुआती आवंटन 2.55 ट्रिलियन रुपये से लगभग 17.65 प्रतिशत अधिक है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि पाकिस्तान अपना स्वीकृत बजट और साल के अंत का वित्तीय विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराता है, लेकिन सेना और खुफिया एजेंसियों के बजट तथा उनके खर्च की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती।
अमेरिका ने पाकिस्तान के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें
अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान के वित्तीय पारदर्शिता ढांचे में सुधार के लिए तीन प्रमुख कदम उठाने की बात कही गई है। बजट प्रस्ताव समय पर सार्वजनिक करे पाकिस्तान : अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान अपनी सरकार का एग्जीक्यूटिव बजट प्रस्ताव उचित समय पर सार्वजनिक करे। इससे संसद और नागरिक समाज को बजट पारित होने से पहले सरकारी खर्च की समीक्षा का पर्याप्त समय मिल सकेगा। सरकारी कर्ज का पूरा ब्योरा दे : अमेरिका ने पाकिस्तान से सरकारी कर्ज और उससे जुड़ी देनदारियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने को भी कहा है। इससे देश की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। सेना और खुफिया खर्च पर हो निगरानी : रिपोर्ट में सबसे अहम मांग सैन्य और खुफिया बजट को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि इन खर्चों को प्रभावी संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाया जाए, ताकि सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता हो।
पाकिस्तान के रक्षा बजट में 17.65 फीसदी बढ़ोतरी
पाकिस्तान के रक्षा बजट में इस साल उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026-27 में रक्षा सेवाओं के लिए प्रस्तावित 3 ट्रिलियन रुपये देश की अनुमानित 143.6 ट्रिलियन रुपये की GDP का करीब 2.08 प्रतिशत है। वहीं, यह संघीय सरकार के कुल करीब 18.77 ट्रिलियन रुपये के खर्च का लगभग 16 प्रतिशत बताया गया है।
बढ़ते रक्षा खर्च के बीच अमेरिका का दबाव
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों, कर्ज और राजकोषीय दबाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी और सैन्य खर्च की पारदर्शिता को लेकर अमेरिका की टिप्पणी इस्लामाबाद के लिए अहम मानी जा रही है। अमेरिकी रिपोर्ट का मुख्य जोर इस बात पर है कि सरकारी धन के इस्तेमाल, खासकर सेना और खुफिया एजेंसियों से जुड़े खर्च की जानकारी और निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।




