मॉस्को, 12 अगस्त 2026 : भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन मामले में अपनी ओर से नियुक्त किया है। यह विवाद यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशादबैंक (Oschadbank) की संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को कथित तौर पर हुए नुकसान से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मामला रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बाद पैदा हुए निवेश विवाद से संबंधित है।
रूस-यूक्रेन की कानूनी जंग में पूर्व CJI चंद्रचूड़ की बड़ी भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ एक अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का पक्ष रखेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशादबैंक की ओर से दायर किए गए विवाद की सुनवाई कर रहा है। ओशादबैंक का दावा है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान के बाद यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और बैंकिंग कारोबार को भारी नुकसान हुआ। बैंक के अनुसार, डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया में उसकी संपत्तियां और कारोबारी संचालन प्रभावित हुए।
460 मिलियन डॉलर के नुकसान का दावा
ओशादबैंक के मुताबिक, युद्ध के कारण उसे करीब 460 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। इसमें लगभग 379 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष नुकसान शामिल होने का दावा किया गया है। बैंक का आरोप है कि रूस की कार्रवाई के कारण उसकी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ा। इसी आधार पर उसने अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया है।
1998 की निवेश संधि के तहत चल रहा मामला
यह कानूनी विवाद 1998 में रूस और यूक्रेन के बीच हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते (BIT) से जुड़ा है। ओशादबैंक का कहना है कि रूस ने इस समझौते के तहत निवेशकों को मिलने वाली सुरक्षा और अधिकारों का उल्लंघन किया है। मामले में अब अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों की दलीलें और दावे सुने जाएंगे।
डोनेत्स्क से जापोरिज्जिया तक संपत्तियों का विवाद
विवाद में यूक्रेन के उन क्षेत्रों की संपत्तियां और बैंकिंग गतिविधियां शामिल हैं, जहां युद्ध के दौरान हालात तेजी से बदले। ओशादबैंक का कहना है कि इन क्षेत्रों में उसकी कई संपत्तियां और कारोबारी संचालन प्रभावित हुए। बैंक की ओर से नुकसान की भरपाई के लिए कानूनी दावा किया गया है, जबकि रूस इस मामले में अपना पक्ष अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन प्रक्रिया के माध्यम से रख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में चंद्रचूड़ की नियुक्ति क्यों अहम ?
भारत के पूर्व CJI के रूप में डीवाई चंद्रचूड़ का लंबा न्यायिक अनुभव रहा है। अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में उनकी नियुक्ति रूस-यूक्रेन से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल विवाद को और महत्वपूर्ण बनाती है। यह मामला केवल संपत्तियों के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून, युद्ध से हुए नुकसान और देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौतों की व्याख्या से भी जुड़ा हुआ है।




