वॉशिंगटन | 8 अगस्त 2026

रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर प्रस्तावित 100 फीसदी टैरिफ के मुद्दे पर अमेरिका में ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटर रॉब वाइडेन और रैंड पॉल ने ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित टैरिफ नीति पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे अमेरिका के अपने रणनीतिक और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं। दोनों सीनेटरों ने भारत के साथ रिश्तों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे समय में जब अमेरिका चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत के साथ सहयोग मजबूत करना चाहता है, उस पर भारी टैरिफ लगाना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है।

अमेरिकी सीनेट में 86-11 वोट से बिल पास

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर दबाव बढ़ाने वाले ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 86-11 वोटों से मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल, गैस या अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदना जारी रखते हैं। भारत और चीन भी संभावित रूप से इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।

भारत पर टैरिफ के खिलाफ क्यों हैं अमेरिकी सीनेटर ?

सीनेटर रैंड पॉल ने भारत पर इतने भारी टैरिफ को अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया। उनका तर्क है कि इससे भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों में अस्थिरता पैदा हो सकती है। सीनेटर रॉब वाइडेन ने भी प्रस्तावित टैरिफ का विरोध किया। उनका कहना है कि चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत को अमेरिका के करीब लाने के प्रयासों के बीच उस पर 100 फीसदी टैरिफ लगाना उचित नहीं होगा। यानी अमेरिकी सीनेट में यह सवाल उठ रहा है कि रूस पर दबाव बनाने की कोशिश में भारत जैसे अहम साझेदार के साथ व्यापारिक रिश्तों को नुकसान पहुंचाना अमेरिका के लिए कितना फायदेमंद होगा।

बिल का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना

प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके तहत उन देशों को भी निशाना बनाने का प्रावधान है, जो रूस के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा कारोबार जारी रखते हैं।अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि रूसी ऊर्जा की खरीद से मॉस्को की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और इससे यूक्रेन में जारी युद्ध के लिए रूस को आर्थिक संसाधन मिल सकते हैं।

रूसी अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी प्रतिबंध

बिल में रूस के वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और युद्ध से संबंधित संस्थाओं पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा रूस के ऊर्जा निर्यात पर मौजूदा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तेल टैंकरों पर भी प्रतिबंधों को विस्तार देने की बात कही गई है।

राष्ट्रपति को प्रतिबंध हटाने का अधिकार भी

प्रस्तावित कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों या प्रस्तावित कार्रवाई को हटाने का अधिकार देने का प्रावधान भी है। इसके लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस के सामने यह साबित करना होगा कि ऐसा कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ सकता है असर

यदि भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की नीति आगे बढ़ती है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। एक तरफ अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीदता रहा है। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक अहम कूटनीतिक और व्यापारिक मुद्दा बन सकता है।