नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 13 अगस्त 2026 : रूस और पाकिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे कुछ विशेष चल रहा है। अगर इस घटनाक्रम को देखा जाए तो यह कहा जा सकता है कि इन दोनों देशों के बीच पिछले कुछ दिनों में नजदीकी भी बढ़ी है। सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है। रूस व पाकिस्तान की बढ़ती साझेदारी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि रूस लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है। हाल के घटनाक्रमों ने रूस-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नई चर्चा जरूर तेज कर दी है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर रूस के भारत से दूर होकर पाकिस्तान के खेमे में जाने के रूप में देखना अभी बहुत जल्दबाजी ही होगी।
आतंकवाद के खिलाफ रूस-पाकिस्तान की बढ़ी बातचीत
23 जून को इस्लामाबाद में रूस और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच आतंकवाद विरोधी वर्किंग ग्रुप की बैठक हुई। यह इस तरह की 12वीं बैठक थी। बातचीत में खासतौर पर अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा खतरों और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान की चिंता मुख्य रूप से अफगानिस्तान से जुड़े आतंकी समूहों को लेकर है, जबकि रूस की प्रमुख चिंता इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस यानी ISKP से जुड़ी हुई है। हालांकि दोनों देशों के हित पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ सहयोग ने उनके बीच संवाद को जरूर मजबूत किया है।
व्यापार और ऊर्जा में भी बढ़ रहा सहयोग
सुरक्षा के साथ-साथ रूस और पाकिस्तान आर्थिक रिश्तों को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों ने 2030 तक आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाले कार्यक्रम पर काम करने पर अपनी-अपनी सहमति जताई है। इसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ाना तथा कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ी है। पाकिस्तानी पक्ष रूस को अब पुराने दौर के मुकाबले अधिक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश कर रहा है।
अब रेल कनेक्टिविटी पर भी नजर
रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सहयोग का एक अहम पहलू कनेक्टिविटी भी है। पाकिस्तान इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ने की संभावनाओं पर गहन विचार कर रहा है। यह नेटवर्क रूस को ईरान, भारत और मध्य एशिया से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना हो सकती है। रूस की ओर से हिंद महासागर तक पहुंच बनाने के लिए संभावित रेलवे मार्गों पर भी चर्चा की जा रही है। ऐसे प्रस्तावों के आगे बढ़ने से रूस को एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अपने व्यापारिक संपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
क्या भारत के लिए बढ़ रही है चिंता ?
रूस-पाकिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग निश्चित तौर पर भारत के लिए रणनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब दक्षिण एशिया में चीन, पाकिस्तान और रूस के बीच अलग-अलग मुद्दों पर संवाद बढ़ रहा है। अफगानिस्तान भी इस पूरे समीकरण का अहम हिस्सा है। भारत काबुल में अपनी रणनीतिक और कूटनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि रूस भी अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों में सक्रिय है। हालांकि रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी को भारत-रूस संबंधों के खत्म होने या रूस के पूरी तरह पाकिस्तान के खेमे में जाने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। रूस और भारत के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के दशकों पुराने रिश्ते हैं।फिलहाल तस्वीर यह है कि मॉस्को इस्लामाबाद के साथ अपने संबंधों को व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर मजबूत कर रहा है, जबकि भारत के लिए चुनौती यह है कि बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच वह रूस के साथ अपनी पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को किस तरह और मजबूत रखता है।




