लखनऊ, 25 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को अपने पैतृक गांव और क्षेत्र के विकास से जोड़ने के लिए मातृभूमि योजना शुरू की है। इस योजना के तहत कोई व्यक्ति या निजी संस्था अपने माता-पिता या पूर्वजों की याद में गांव में सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्माण कार्य कराती है, तो परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार की ओर से दिया जाएगा।

गांव के विकास में योगदान का मौका

मातृभूमि योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को अपने गांव से जोड़ना है, जो नौकरी, कारोबार या अन्य कारणों से शहरों या दूसरे राज्यों में रह रहे हैं। योजना के जरिए प्रवासी और आर्थिक रूप से सक्षम लोग अपने पैतृक गांव में सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में योगदान दे सकेंगे।

योजना के तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या संबंधित क्षेत्र में जनहित से जुड़े निर्माण कार्य कराए जा सकते हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित व्यक्ति या संस्था के योगदान को दर्शाने के लिए शिलापट्ट भी लगाया जा सकता है।

किन कामों के लिए मिलेगी मदद?

योजना के तहत बरात घर, सामुदायिक भवन, स्कूल-कॉलेज और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इसके अलावा सीसी रोड, आरसीसी ड्रेन, ओपन जिम, स्किल सेंटर और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसे काम भी कराए जा सकते हैं।

विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हॉस्टल, पुस्तकालय और व्यायामशाला बनाने के साथ चौराहों पर सीसीटीवी लगाने तथा अंत्येष्टि स्थल के विकास का प्रावधान भी बताया गया है।

सोलर लाइट से तालाब सौंदर्यीकरण तक

मातृभूमि योजना के तहत गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट और एलईडी लाइट लगाने, वाटर कूलर और यात्री शेड बनाने जैसे काम भी शामिल हैं। इसके अलावा तालाबों के सौंदर्यीकरण जैसे विकास कार्य भी कराए जा सकते हैं।

अधिकारियों को प्रचार-प्रसार के निर्देश

योजना को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि गांवों में योजना का प्रचार-प्रसार करें और लोगों को सार्वजनिक उपयोग के विकास कार्यों में भागीदारी के लिए प्रेरित करें।