Google Maps आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेविगेशन प्लेटफॉर्म्स में से एक है, लेकिन हाल के वर्षों में इससे जुड़ी कई घटनाओं ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल भी खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि Google Maps एक बेहद उपयोगी टूल है, लेकिन इस पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है।

कई अध्ययनों के अनुसार, विकसित देशों में Google Maps की एड्रेस और रूट मैचिंग सटीकता 95% से अधिक मानी जाती है। वहीं कुछ स्वतंत्र शोधों में इसकी सटीकता 80% से 95% के बीच बताई गई है, जो क्षेत्र और सड़क की स्थिति पर निर्भर करती है।

भारत में Google Maps को लेकर कई चर्चित घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश में तीन लोगों की मौत उस समय हो गई जब उनकी कार एक अधूरे पुल से नीचे गिर गई। रिपोर्ट्स में सामने आया कि चालक Google Maps के निर्देशों का पालन कर रहा था। इसके अलावा 2023 में केरल के दो डॉक्टरों की मौत उस समय हो गई जब उनकी कार नदी में जा गिरी। ऐसे कई मामलों में गलत या अधूरी जानकारी को जिम्मेदार बताया गया।

2024 में ही उत्तर प्रदेश में कुछ लोगों को नहर से बचाया गया, जबकि एक परिवार बिहार से गोवा जाते समय कर्नाटक के जंगल में फंस गया था। वहीं तमिलनाडु में एक कार Google Maps के निर्देशों का पालन करते हुए सीढ़ियों तक पहुंच गई थी।

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। Google के एक अध्ययन के अनुसार, Google Maps का उपयोग करने वाले लोग औसतन 6.5% यात्रा समय और 1.7% कार्बन उत्सर्जन की बचत करते हैं। जिन यात्रियों को वैकल्पिक रूट मिला, उनके लिए समय की बचत 12.5% तक दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि गलत दिशा मिलने के पीछे सड़क बंद होना, अधूरी मैपिंग, खराब GPS सिग्नल, मौसम, निर्माण कार्य और स्थानीय बदलाव जैसी वजहें हो सकती हैं। यही कारण है कि Google ने भारत के लिए संकरी सड़कों और फ्लाईओवर की बेहतर पहचान करने वाले नए AI फीचर्स भी शुरू किए हैं।

कुल मिलाकर, Google Maps एक शक्तिशाली और उपयोगी तकनीक है, लेकिन सड़क पर अंतिम फैसला हमेशा चालक की समझ और स्थानीय संकेतों के आधार पर ही होना चाहिए। तकनीक मदद कर सकती है, लेकिन जिम्मेदारी इंसान की ही रहती है।