नई दिल्ली | 14 जुलाई 2026
देश के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रहे जल संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार ग्राम पंचायत स्तर पर Water Budget (जल बजट) तैयार करने की राष्ट्रीय पहल शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक गांव में उपलब्ध जल संसाधनों और सालभर की पानी की जरूरत का वैज्ञानिक आकलन करना है, ताकि जल संरक्षण और जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। पहले चरण में देश के 10 राज्यों की 1,000 ग्राम पंचायतों को इस परियोजना में शामिल किया गया है।
क्या है Water Budget और क्यों है जरूरी?
Water Budget का अर्थ है किसी गांव में एक वर्ष के दौरान उपलब्ध पानी और उसकी कुल आवश्यकता का विस्तृत वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करना। इसमें पेयजल, घरेलू उपयोग, कृषि सिंचाई, पशुपालन, वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर, तालाब, कुएं, नहर और बोरवेल जैसे सभी जल स्रोतों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर यह भी तय होगा कि भविष्य में जल संकट की आशंका कितनी है और उससे निपटने के लिए कौन-कौन से कदम उठाने होंगे।
10 राज्यों की 1,000 पंचायतों से होगी शुरुआत
इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के 100 जिलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। ग्राम पंचायतें स्थानीय स्तर पर सभी जरूरी आंकड़े जुटाकर अपनी Water Security Plan तैयार करेंगी, जिसे ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से भी जोड़ा जाएगा।
किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि इस पहल से सिंचाई की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी, भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वर्षा जल का अधिक प्रभावी उपयोग होगा। साथ ही जल संकट वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान कर समाधान तैयार किया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बेहतर होगी, जबकि महिलाओं और बच्चों को पानी लाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।
मास्टर ट्रेनर्स देंगे पंचायतों को प्रशिक्षण
योजना को सफल बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर Master Trainers तैयार कर रहा है। ये प्रशिक्षक जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों को Water Budget तैयार करने और वैज्ञानिक तरीके से जल सुरक्षा योजना बनाने का प्रशिक्षण देंगे। 13 से 16 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली में इसके लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि स्थानीय समुदाय, किसान, महिला समूह और पंचायतों की भागीदारी से गांवों में जल प्रबंधन की एक स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।




