नई दिल्ली, 14 अगस्त। देर रात खाना खाना आज की बदलती जीवनशैली का हिस्सा बन गया है, लेकिन लगातार रात में देर से भोजन करने की आदत शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकती है। हालिया शोधों में भोजन के समय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर लगातार अध्ययन किया जा रहा है। 2025 की एक समीक्षा में पाया गया कि जैविक रात के करीब भोजन करने से ग्लूकोज टॉलरेंस और फैट मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकते हैं।

ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म पर असर

शोध के अनुसार, शरीर दिन के समय भोजन को प्रोसेस करने के लिए अधिक अनुकूल रहता है। देर रात भोजन करने से ग्लूकोज नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। 2024 की एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 29 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल और 2,485 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें दिन के शुरुआती हिस्से में कैलोरी लेने और समय-सीमित भोजन से वजन तथा कुछ मेटाबॉलिक संकेतकों में बेहतर परिणाम मिले।

वजन बढ़ने का खतरा

देर रात खाना अक्सर अतिरिक्त कैलोरी लेने और अनियमित खाने की आदत से जुड़ा होता है। शोध समीक्षाओं में रात में या दिन के देर के हिस्से में भोजन करने और मोटापे तथा मेटाबॉलिक समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि केवल खाने का समय ही वजन बढ़ने का एकमात्र कारण नहीं है; कुल कैलोरी, भोजन की गुणवत्ता, नींद और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

नींद और एसिडिटी भी हो सकती है प्रभावित

सोने के करीब खाना खाने से पेट भरा रहने, हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो नींद की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती हैं। 2024 के एक अध्ययन में देर से भोजन करने और सोने के बीच कम अंतर को खराब नींद की गुणवत्ता तथा नींद आने में अधिक समय से जोड़ा गया।

हार्वर्ड और NIH से जुड़े शोध क्या कहते हैं?

अमेरिका के National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI) के अनुसार, भोजन का समय, सर्केडियन रिदम और स्वास्थ्य के बीच संबंध अब “क्रोनोन्यूट्रिशन” के रूप में तेजी से अध्ययन किया जा रहा है। Harvard T.H. Chan School of Public Health की जानकारी भी नियमित भोजन समय और बेहतर नींद की दिनचर्या को महत्व देती है। वहीं हार्वर्ड से जुड़े 2025 के शोध-सार में दिन के शुरुआती समय में खाने वाली टाइम-रिस्ट्रिक्टेड डाइट का ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के लिए अधिक लाभकारी होने की बात कही गई है।

क्या करना बेहतर है?

देर रात भारी भोजन करने के बजाय नियमित समय पर हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर सोने से ठीक पहले बहुत अधिक, तला-भुना या मसालेदार खाना लेने से बचना उपयोगी है। हालांकि हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है और देर रात भोजन के प्रभाव उम्र, स्वास्थ्य, काम की शिफ्ट और कुल खान-पान पर निर्भर कर सकते हैं। उपलब्ध शोध देर रात खाने को लेकर चिंता जरूर दिखाते हैं, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए बीमारी का सीधा कारण मानना उचित नहीं होगा।