नई दिल्ली, 16 अगस्त। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में पेशाब से जुड़ी कई परेशानियां आम हो सकती हैं। बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना या पेशाब की धार कमजोर होना जैसी समस्याओं को अक्सर उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, लगातार बने रहने वाले ऐसे बदलावों की वजह जानना जरूरी है।
हर पेशाब की परेशानी कैंसर नहीं
प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में कई पुरुषों में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। वहीं, पेशाब से जुड़ी परेशानी का मतलब हमेशा कैंसर भी नहीं होता। उम्र के साथ प्रोस्टेट का बढ़ना यानी Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) इन समस्याओं की एक आम वजह हो सकती है।
इसके अलावा यूरिनरी इंफेक्शन, प्रोस्टेटाइटिस, ओवरएक्टिव ब्लैडर और डायबिटीज जैसी स्थितियां भी बार-बार पेशाब आने या पेशाब में परेशानी का कारण बन सकती हैं।
किन संकेतों को गंभीरता से लें?
बीमारी बढ़ने पर कुछ पुरुषों में पेशाब करने में परेशानी, कमजोर धार या बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में पेशाब या वीर्य में खून दिखाई देना, कमर के निचले हिस्से, कूल्हे या पेल्विक क्षेत्र में लगातार दर्द जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
हालांकि, इन लक्षणों का संबंध अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी हो सकता है। इसलिए किसी भी संकेत को देखकर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
उम्र और पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण
प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। यदि परिवार में पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर रहा है, तो जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे पुरुषों को डॉक्टर से स्क्रीनिंग के बारे में चर्चा करनी चाहिए।
PSA टेस्ट को लेकर समझें जरूरी बात
डॉ. राजीव सूद, Principal Director, Urology Sciences & Andrology, Pacific OneHealth Hospital, New Delhi के अनुसार, किसी भी urinary symptom को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार हो रहे बदलावों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।
PSA टेस्ट प्रोस्टेट कैंसर की जांच में उपयोगी हो सकता है, लेकिन बढ़ा हुआ PSA स्तर अकेले कैंसर की पुष्टि नहीं करता। प्रोस्टेट बढ़ने या प्रोस्टेटाइटिस जैसी स्थितियों में भी PSA बढ़ सकता है। इसलिए जांच और स्क्रीनिंग का फैसला उम्र, पारिवारिक इतिहास, लक्षण और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।




