नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026
सिरदर्द एक ऐसी समस्या है जिससे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी परेशान होता है। अधिकतर मामलों में यह तनाव, नींद की कमी, माइग्रेन, मौसम में बदलाव या मानसिक दबाव के कारण होता है। लेकिन जब सिरदर्द बार-बार होने लगे या उसके साथ कुछ गंभीर लक्षण दिखाई दें, तब इसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर आवश्यकता पड़ने पर MRI कराने की सलाह दे सकते हैं।
बेंगलुरु स्थित एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. लोकेश बी के अनुसार, हर सिरदर्द के लिए MRI कराना जरूरी नहीं होता। अधिकांश सिरदर्द प्राइमरी हेडेक की श्रेणी में आते हैं, जिनमें माइग्रेन, टेंशन हेडेक और क्लस्टर हेडेक शामिल हैं। इनका पता मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और सामान्य जांच के आधार पर लगाया जा सकता है।
किन परिस्थितियों में डॉक्टर देते हैं MRI की सलाह?
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अचानक बहुत तेज सिरदर्द शुरू हो, दर्द लगातार बढ़ता जाए, पहली बार 50 वर्ष की उम्र के बाद सिरदर्द हो, या इसके साथ बुखार, दौरे, कमजोरी, बोलने में परेशानी, धुंधला दिखना, उल्टी, बेहोशी या भ्रम जैसी समस्याएं हों, तो MRI कराना आवश्यक हो सकता है। इसके अलावा सिर में चोट लगने, कैंसर, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या लंबे समय से इलाज के बावजूद राहत न मिलने की स्थिति में भी डॉक्टर MRI की सलाह देते हैं।
क्या है MRI और क्यों है महत्वपूर्ण?
MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) एक आधुनिक जांच है, जिसमें चुंबकीय तरंगों और रेडियो वेव्स की मदद से मस्तिष्क की विस्तृत तस्वीर तैयार की जाती है। इसमें किसी प्रकार की रेडिएशन का उपयोग नहीं होता। यह जांच ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, रक्तस्राव या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की पहचान करने में मदद करती है।
डॉक्टर की सलाह के बिना न कराएं जांच
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के MRI कराने से न केवल खर्च बढ़ता है, बल्कि कई बार सामान्य बदलाव भी बीमारी समझ लिए जाते हैं, जिससे अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। इसलिए यदि सिरदर्द के साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही जांच कराएं।




