सरायकेला | 10 जुलाई 2026
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बीते 24 घंटों के भीतर सर्पदंश के शिकार 10 लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल, सरायकेला लाया गया। राहत की बात यह रही कि सभी मरीजों को समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध कराया गया, जिससे उनकी जान बच गई और फिलहाल सभी की हालत सामान्य बताई जा रही है।
जून में सामने आए 67 मामले, छह महीने में 162 लोग हुए शिकार
सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, केवल जून 2026 में सर्पदंश के 67 मामले दर्ज किए गए। वहीं जनवरी से जून 2026 तक महज छह महीनों में 162 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि समय पर उपचार मिलने के कारण सभी मरीजों की जान बचाई जा सकी।
साढ़े तीन वर्षों में 941 मरीजों का हुआ इलाज
अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 तक कुल 779 सर्पदंश के मामले दर्ज किए गए थे। वहीं वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही 162 नए मामले सामने आ चुके हैं। इस तरह जनवरी 2023 से जून 2026 तक कुल 941 लोग सर्पदंश का शिकार होकर अस्पताल पहुंचे, जिनका सफल उपचार किया गया।
सिविल सर्जन की अपील- झाड़-फूंक में समय न गंवाएं
सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें। उन्होंने कहा कि मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाना चाहिए। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम और अन्य जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं।
सभी स्वास्थ्य केंद्रों को किया गया अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और सदर अस्पताल को अलर्ट मोड पर रखा है। सभी केंद्रों पर एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। साथ ही आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
बरसात में क्यों बढ़ते हैं सर्पदंश के मामले?
सरायकेला के स्नेक कैचर (सर्प मित्र) राजा बारीक के अनुसार, बारिश के दौरान बिलों में पानी भर जाने से सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने लोगों से रात में टॉर्च का उपयोग करने, नंगे पैर बाहर न निकलने, घर और आसपास साफ-सफाई रखने तथा जमीन पर सोने से बचने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी और समय पर इलाज से सर्पदंश से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।




