पटना | 08 जुलाई 2026
पटना: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने चिकित्सा कर्मियों की मनमानी छुट्टियों पर सख्ती करते हुए सभी जिला स्वास्थ्य समितियों और प्रखंड स्तरीय अस्पताल प्रबंधन को नए निर्देश जारी किए हैं। अब सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी की मासिक अवकाश सूची तैयार करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सभी प्रकार की छुट्टियों का रिकॉर्ड विभाग द्वारा निर्धारित प्रारूप में सुरक्षित रखना होगा।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि एएनएम, आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्य कर्मी बिना समुचित वैकल्पिक व्यवस्था के अवकाश पर चले जाते हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में संचालित नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा था। विशेष रूप से नियमित टीकाकरण (आरआई), गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, बच्चों के टीकाकरण, पोषण कार्यक्रम और जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियान प्रभावित हो रहे थे।
व्हाट्सएप से स्वीकृत छुट्टियों का भी रखना होगा रिकॉर्ड
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल लिखित आवेदन ही नहीं, बल्कि व्हाट्सएप ग्रुप या अन्य डिजिटल माध्यम से स्वीकृत एसएल (Special Leave), सीएल (Casual Leave), एनएल और अन्य सभी प्रकार की छुट्टियों का भी पूरा विवरण अवकाश रजिस्टर में दर्ज करना होगा। बिना उचित रिकॉर्ड के किसी भी कर्मचारी की छुट्टी मान्य नहीं मानी जाएगी।
निरीक्षण में गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई
जिला स्वास्थ्य समिति ने अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि औचक निरीक्षण के दौरान अवकाश रजिस्टर में किसी प्रकार की अनियमितता, गलत प्रविष्टि या रिकॉर्ड की कमी पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल प्रबंधक और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि अवकाश संबंधी अभिलेख नियमित रूप से अपडेट रखें और जरूरत पड़ने पर विभाग को उपलब्ध कराएं।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में आएगा सुधार
विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी। संस्थागत प्रसव, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों के टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों के संचालन में अब अनावश्यक बाधाएं कम होंगी। साथ ही जिन स्वास्थ्य कर्मियों के अवकाश पर रहने की स्थिति होगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित कर आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बेहतर होगी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलने की उम्मीद है।




