नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयरन, कैल्शियम और विटामिन-डी जितने जरूरी हैं, उतना ही महत्वपूर्ण फोलेट (विटामिन B9) भी है। यह विटामिन नई कोशिकाओं के निर्माण, डीएनए और आरएनए के विकास, लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन और तंत्रिका तंत्र के सही संचालन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड और असंतुलित खानपान के कारण युवाओं में भी फोलेट की कमी तेजी से देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फोलेट की कमी धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य थकान या तनाव जैसे लगते हैं, इसलिए अधिकांश लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय पर इसकी पहचान नहीं की जाए तो यह एनीमिया, मानसिक समस्याओं और हृदय संबंधी जोखिमों का कारण बन सकती है।
ये हैं फोलेट की कमी के प्रमुख लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार फोलेट की कमी होने पर व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी, काम में मन न लगना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा बार-बार मुंह में छाले होना, जीभ की नोक का लाल या सूज जाना, त्वचा का पीला पड़ना, चक्कर आना, सिरदर्द और सांस फूलना भी इसके महत्वपूर्ण संकेत माने जाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फोलेट की कमी से मेगालोब्लास्टिक एनीमिया हो सकता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से बड़ी हो जाती हैं और शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पातीं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर व्यक्ति की कार्यक्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर
फोलेट केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी से दिमाग में बनने वाले महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर प्रभावित होते हैं। इससे व्यक्ति को ब्रेन फॉग, भूलने की समस्या, मानसिक सुस्ती, तनाव और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक फोलेट की कमी रहने पर हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है।
इन चीजों को भोजन में करें शामिल
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फोलेट की कमी से बचने के लिए भोजन में पालक, मेथी, ब्रोकली, दालें, राजमा, छोले, साबुत अनाज, चुकंदर, शतावरी, संतरा, मौसंबी
, एवोकाडो, मेवे और विभिन्न बीज नियमित रूप से शामिल करें। संतुलित आहार शरीर में विटामिन B9 की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने में मदद करता है।
कब करानी चाहिए जांच?
यदि लंबे समय तक थकान, मुंह में बार-बार छाले, जीभ में सूजन या एनीमिया जैसे लक्षण बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार सीबीसी (Complete Blood Count), सीरम फोलेट, विटामिन B12 और होमोसिस्टीन जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बिना सलाह के सप्लीमेंट लेने के बजाय पहले सही जांच कराना और कारण का पता लगाना अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।





