रामगढ़ | 8 अगस्त 2026

झारखंड के रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड स्थित हरली गांव की अनीता देवी आज अपने परिवार के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। कभी छोटी जोत की खेती और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाला उनका परिवार अब बकरी पालन और पोषण आधारित खेती के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहा है।

अनीता देवी ने सपोर्ट स्वयं सेमी संस्था के सहयोग से आजीविका के नए साधनों को अपनाया। संस्था की ओर से उन्हें वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, टीकाकरण, पशु प्रबंधन और पोषण वाटिका तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के बाद शुरू किया बकरी पालन

सपोर्ट संस्था के फूड न्यूट्रिशन एंड इनकम एन्हांसमेंट प्रोजेक्ट के तहत मिले प्रशिक्षण का अनीता देवी ने अपने गांव में बेहतर इस्तेमाल किया। उन्होंने घर के पास बकरी पालन शुरू करने के साथ पोषण वाटिका भी विकसित की।

इसके अलावा उन्होंने नैनो ऑर्चर्ड तैयार किया, जिसमें पपीता, परवल समेत कई पौष्टिक फसलों की खेती शुरू की। इससे परिवार को अपने इस्तेमाल के लिए ताजा और पौष्टिक खाद्य सामग्री मिलने लगी।

75 से 84 हजार रुपये तक हो रही अतिरिक्त कमाई

बकरी पालन और नैनो ऑर्चर्ड से अनीता देवी के परिवार की आमदनी में भी इजाफा हुआ। अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेचने से उन्हें हर साल करीब 75 हजार से 84 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होने लगी।

इस अतिरिक्त आमदनी ने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद की है। अब रोजमर्रा की जरूरतों के लिए केवल मजदूरी और छोटी खेती पर निर्भरता पहले जैसी नहीं रही।

दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

अनीता देवी की सफलता का असर अब गांव की दूसरी महिलाओं पर भी दिखाई दे रहा है। कई महिलाएं बकरी पालन, पोषण वाटिका और छोटे स्तर की खेती को आय का जरिया बनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

अनीता की कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और मेहनत के जरिए ग्रामीण महिलाएं सीमित संसाधनों में भी अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। यह पहल ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।