नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 : संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही खत्म होने के बाद भी सरकार की रणनीति को लेकर सियासी अटकलें जारी हैं। 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके औपचारिक सत्रावसान की घोषणा अब तक नहीं हुई है। ऐसे में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सरकार की संभावित रणनीति पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार ने परिसीमन विधेयक को लेकर अपने विकल्प खुले रखे हैं। जरूरत पड़ने पर मौजूदा सत्र को आगे बढ़ाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को सदन में पेश करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक सहमति और सदन में सुचारू माहौल बनाए रखना सरकार के लिए अहम चुनौती होगी।

आठ दिन बाद भी सत्रावसान नहीं

13 अगस्त को दोनों सदनों की कार्यवाही समाप्त होने के बाद भी संसद का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। सामान्य तौर पर सत्र समाप्त होने के कुछ समय बाद मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को सत्रावसान की सलाह देता है। इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश से प्रक्रिया पूरी होती है। इस बार हुई देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। खासतौर पर इसलिए क्योंकि परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की रणनीति पहले से चर्चा में रही है।

परिसीमन विधेयक पर क्या है सरकार की रणनीति ?

परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी। ऐसे विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। सरकार के सूत्रों का दावा है कि संख्याबल उसके लिए बड़ी बाधा नहीं है। हालांकि, केवल संख्या पर्याप्त नहीं है। विधेयक को पेश करने के दौरान सदन में व्यवस्था बनाए रखना और राजनीतिक सहमति तैयार करना भी जरूरी होगा। यही वजह है कि सरकार कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों को साधने की कोशिश कर सकती है।

दक्षिण भारत पर क्यों है खास नजर ?

गृह मंत्री अमित शाह की दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में भागीदारी को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में परिसीमन को लेकर पहले से ही राजनीतिक और क्षेत्रीय चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे में दक्षिणी राज्यों की सरकारों और राजनीतिक दलों के रुख को समझना केंद्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाह की दक्षिण भारत यात्रा को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या विशेष सत्र की संभावना है ?

फिलहाल सरकार की ओर से किसी विशेष संसद सत्र को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन मानसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान में देरी और परिसीमन विधेयक को लेकर जारी चर्चाओं ने अटकलों को जरूर बढ़ा दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार मौजूदा सत्र को आगे बढ़ाकर परिसीमन विधेयक संसद में पेश करने की कोशिश करेगी, या फिर इसे अगले सत्र तक टाल दिया जाएगा। आने वाले दिनों में सरकार की अगली राजनीतिक चाल इस मामले में तस्वीर साफ कर सकती है।