नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026 : देश में आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हैं। इस बार जनगणना में लोगों से करीब 40 सवालों के आधार पर जानकारी जुटाई जाएगी। इनमें आधार नंबर, बैंक खाते, धर्म, जन्मस्थान और परिवार से जुड़ी अन्य जानकारियां भी शामिल होने की बात सामने आई है। जनगणना कर्मियों को दिए गए प्रशिक्षण के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहता है तो उस पर दबाव नहीं बनाया जाएगा। संबंधित कॉलम को खाली छोड़ा जा सकता है। ऐसे में यह भी दर्ज होगा कि कुछ सवालों के जवाब उपलब्ध नहीं कराए गए।
जवाब नहीं देने पर क्या होगा ?
जनगणना के दौरान किसी नागरिक को किसी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करना चाहता है, तो संबंधित कॉलम खाली छोड़ा जा सकता है। हालांकि जनगणना में जुटाई गई जानकारी की गोपनीयता को लेकर विशेष प्रावधान हैं। अधिकारियों के मुताबिक जनगणना से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और इसे सामान्य तौर पर अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
पहली बार पूछे जाएंगे कई नए सवाल
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार जनगणना में करीब 40 बिंदुओं पर विशेष रूप से जानकारी जुटाई जाएगी। पिछली जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे। इस बार आधार और बैंक खाते जैसी जानकारी से जुड़े सवाल भी चर्चा में हैं। इतने अधिक सवालों के कारण परिवारों को जानकारी उपलब्ध कराने में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है।
धर्म और जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी
जनगणना में व्यक्ति के साथ-साथ माता-पिता के धर्म और जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी भी मांगी जा सकती है। यदि माता-पिता और बच्चों के धर्म अलग-अलग दर्ज होते हैं, तो इससे जनसंख्या के धार्मिक पैटर्न का सांख्यिकीय अध्ययन किया जा सकता है। इसी तरह जन्मस्थान, वर्तमान निवास और अन्य जनसांख्यिकीय जानकारियों के आधार पर प्रवास और सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़े भी तैयार किए जा सकते हैं।
क्या धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह का पता चलेगा ?
धर्म से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के मिलान से विशेषज्ञों को धार्मिक संरचना और उसमें होने वाले बदलावों का सांख्यिकीय आकलन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन या अंतरधार्मिक विवाह का व्यक्तिगत निष्कर्ष निकालना अलग विषय है। इसी तरह परिवार के सदस्यों की जाति से जुड़ी जानकारी के आधार पर अंतरजातीय विवाह से संबंधित व्यापक सामाजिक आंकड़ों का अध्ययन संभव हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत मामलों की पहचान और निष्कर्ष निकालने को लेकर जनगणना की गोपनीयता व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
क्या जनगणना के आंकड़ों से NPR बनेगा ?
जनगणना में जन्मस्थान, प्रवास, धर्म, जन्मतिथि और पहचान से जुड़ी जानकारियां जुटाए जाने के कारण राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सरकार ने इस रिपोर्ट के संदर्भ में NPR तैयार करने की कोई अलग घोषणा नहीं की है।NPR में किसी क्षेत्र में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों का विवरण दर्ज किया जाता है। इसे पहली बार वर्ष 2010 में तैयार किया गया था।
40 सवालों वाली जनगणना पर क्यों है नजर ?
इस बार जनगणना में बढ़ी हुई जानकारी और डिजिटल प्रक्रिया को लेकर लोगों की दिलचस्पी और सवाल दोनों बढ़े हैं। खासकर आधार, बैंक खाते और धर्म जैसी संवेदनशील जानकारियों को लेकर निजता का मुद्दा महत्वपूर्ण है। जनगणना में यदि कोई व्यक्ति किसी सवाल का जवाब नहीं देता है तो नियमों के मुताबिक उस पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे में अंतिम आंकड़ों में उपलब्ध और अनुपलब्ध जानकारी दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।




