नई दिल्ली, 17 अगस्त 2026 : भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व वाली इस टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अहम जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के साथ उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में स्मृति ईरानी के सामने भाजपा के लिए मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती होगी।
2024 की हार के बाद स्मृति ईरानी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी करीब दो साल तक पार्टी में किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रहीं। अब बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देकर उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है। स्मृति ईरानी का राजनीतिक रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश में खास तौर पर चर्चा में रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था।
क्यों अहम है यूपी की जिम्मेदारी ?
उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां विधानसभा की 403 सीटें हैं, जबकि लोकसभा की 80 सीटें हैं। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्य की सत्ता के लिए ही नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा के सामने प्रदेश में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी। वहीं विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार सरकार को अलग-अलग मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेठी में राहुल गांधी को हराकर सुर्खियों में आई थीं स्मृति
स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर राहुल गांधी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की थी। अमेठी लंबे समय तक गांधी परिवार का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। राहुल गांधी ने 2004, 2009 और 2014 में लगातार तीन बार अमेठी से जीत दर्ज की थी। लेकिन 2019 में स्मृति ईरानी ने उन्हें हराकर बड़ा राजनीतिक बदलाव किया। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के केएल शर्मा ने अमेठी से स्मृति ईरानी को हरा दिया था। इसके बाद अब बीजेपी ने उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर एक बार फिर सक्रिय भूमिका में ला दिया है।
2027 में स्मृति के सामने क्या है चुनौती ?
उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी संभालने के बाद स्मृति ईरानी के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी। पार्टी को संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ चुनावी मुद्दों, सहयोगी दलों और विपक्ष की रणनीति का मुकाबला करना होगा। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 में बीजेपी की सत्ता को बनाए रखने की होगी। इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रदर्शन को मजबूत करना भी उनकी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा माना जा सकता है।




