नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ अमेरिका आने वाले संघ नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उच्चस्तरीय बैठकों से दूर रखने की बात भी कही है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि USCIRF की सिफारिशें अपने आप किसी संगठन पर प्रतिबंध लागू नहीं करतीं। अंतिम निर्णय अमेरिकी सरकार का होता है।
भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर
RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वे भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद करेंगे। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उस दौरान उन्होंने शिकागो में वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस को संबोधित किया था।
USCIRF ने RSS नेताओं को लेकर क्या कहा ?
USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और आयोग के अनुसार संघ से जुड़े संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों के आरोप रहे हैं। USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने भी अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों को लेकर RSS से जुड़े लोगों पर कार्रवाई पर विचार करने की अपील की है। हालांकि अमेरिकी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कनाडा में 100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के दौरे का समर्थन किया
वहीं, कनाडा में 100 से अधिक संगठनों ने मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। इन संगठनों ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को एक पत्र लिखकर मोहन भागवत के दौरे को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की है। संगठनों का साफ कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए तथा कानून के मुताबिक ही आगे की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
भारत को लेकर USCIRF की पुरानी सिफारिश
USCIRF पहले भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाता रहा है। आयोग ने कई मौकों पर अमेरिका से भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ (Country of Particular Concern-CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। USCIRF ने पहली बार 2004 में ऐसी सिफारिश की थी और 2020 में इसे फिर दोहराया। इसके बाद 2021 से 2026 तक की रिपोर्टों में भी आयोग ने भारत को CPC सूची में शामिल करने की सिफारिश की। हालांकि, USCIRF की सिफारिश का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत को CPC घोषित कर दिया है।
RSS और RAW को लेकर भी कर चुका है सिफारिश
मार्च 2026 की USCIRF रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। इस रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंध की सिफारिश की गई थी। हालांकि भारत सरकार ने USCIRF की इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आयोग की रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसे भारत की चुनिंदा आलोचना करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर भी विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
USCIRF क्या है और इसके पास कितनी शक्ति है ?
United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) अमेरिका की एक स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसका गठन अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के International Religious Freedom Act के तहत किया था। आयोग दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करता है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देता है। USCIRF किसी देश, संगठन या व्यक्ति के खिलाफ प्रतिबंध की सिफारिश कर सकता है, लेकिन उसकी सिफारिश से प्रतिबंध अपने आप लागू नहीं होता। अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार के संबंधित अधिकारियों का होता है।




