नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणियों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से गरिमा और जिम्मेदारी की उम्मीद की जाती है।

राहुल के बयान पर राजनाथ का तीखा पलटवार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर राहुल गांधी ने जिस तरह की टिप्पणियां कीं, वह बेहद आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का आचरण स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है। राजनाथ सिंह ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विपक्ष के नेता के पद पर रहते हुए ऐसा व्यवहार नहीं देखा। उन्होंने पुराने दौर के कई नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद सार्वजनिक संवाद में गरिमा और मर्यादा बनाए रखी जाती थी।

सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह का भी किया जिक्र

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जैसे नेताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान विपक्ष में रहते हुए सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री और देश की विदेश नीति पर टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी है।

PM मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी ने क्या कहा था ?

दरअसल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था कि विदेश नीति को केवल दूसरे देशों के नेताओं से गले मिलने तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसी टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से राहुल गांधी पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राहुल गांधी के मन में कोई शिकायत या राजनीतिक असहमति हो सकती है, लेकिन अनुचित टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

'लोकतंत्र में मतभेद जरूरी, लेकिन मर्यादा भी जरूरी'

राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा सकता है और अपनी बात मजबूती से रख सकता है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने राहुल गांधी के आचरण को लेकर कहा कि विपक्ष के नेता से जिम्मेदारी और राजनीतिक गरिमा की अपेक्षा की जाती है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सैनिकों से भी संवाद

राहुल गांधी पर बयान के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों के जवानों से संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिला कैडेटों के पहले बैच के तीनों सेनाओं में अधिकारी के रूप में कमीशन होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि साहस और नेतृत्व किसी एक लिंग तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने भारतीय नौसेना के पोत त्रिवेणी पर आयोजित पहली त्रि-सेवा सर्व-महिला समुद्री परिक्रमा 'समुद्र प्रदक्षिणा' का भी जिक्र किया और इसे नारी शक्ति का प्रतीक बताया।