मुंबई, 18 अगस्त। अगर आप 2 BHK फ्लैट या घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो बजट, लोकेशन और सुविधाओं के साथ कई लोग वास्तु से जुड़ी बातों पर भी ध्यान देते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर के अलग-अलग हिस्सों की दिशा का संबंध घर के वातावरण और सकारात्मकता से माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञ बाबा बिमलेश के अनुसार, 2 BHK घर लेते समय मुख्य द्वार से लेकर रसोई और बेडरूम तक कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

मुख्य दरवाजे की दिशा हो ऐसी

वास्तु के अनुसार घर का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है। प्रवेश द्वार के आसपास ज्यादा सामान या अव्यवस्था रखने से बचना चाहिए। साफ-सुथरा और पर्याप्त रोशनी वाला एंट्री एरिया घर को बेहतर लुक भी देता है।

लिविंग रूम और बालकनी

लिविंग रूम के लिए उत्तर या पूर्व दिशा को अच्छा माना जाता है। इन दिशाओं में खिड़की या बालकनी होने से प्राकृतिक रोशनी और हवा मिल सकती है। उत्तर या पूर्व दिशा की बालकनी को भी वास्तु में अनुकूल माना जाता है।

रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा

वास्तु मान्यताओं में दक्षिण-पूर्व दिशा को रसोई के लिए बेहतर माना जाता है। विकल्प के तौर पर उत्तर-पश्चिम दिशा का भी उल्लेख किया जाता है। रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन और रोशनी होना व्यावहारिक रूप से भी जरूरी है।

पूजा और मास्टर बेडरूम

पूजा के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। वहीं मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को बेहतर माना जाता है। कमरे को व्यवस्थित और अनावश्यक सामान से मुक्त रखना अच्छा रहता है।

बच्चों और गेस्ट रूम की दिशा

बच्चों के कमरे के लिए पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना जाता है। गेस्ट रूम के लिए उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा का विकल्प बताया जाता है। पढ़ाई की जगह पर पर्याप्त रोशनी और हवा का ध्यान रखना जरूरी है।

बाथरूम और फर्नीचर का रखें ध्यान

वास्तु के अनुसार बाथरूम के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा बेहतर मानी जाती है। भारी फर्नीचर दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना भी वास्तु मान्यता का हिस्सा है।

घर खरीदते समय सिर्फ वास्तु पर निर्भर न रहें

2 BHK फ्लैट चुनते समय वास्तु के साथ बजट, लोकेशन, निर्माण की गुणवत्ता, प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन, पार्किंग और रोजमर्रा की जरूरतों को भी जरूर देखें। वास्तु के नियम पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए घर खरीदने का अंतिम फैसला व्यावहारिक जरूरतों और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना बेहतर है।