नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 : भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा मिलने वाली है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने Moon Base Program में शामिल होने का न्योता दे दिया है। दोनों देशों के बीच चंद्रमा की खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत हुई है। यह प्रस्ताव Artemis Accords के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी का असर आने वाले वर्षों में चंद्र मिशनों और अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं पर भी देखने को मिल सकता है।

भारत-अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग पर अहम बैठक

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को लेकर पांच और छह अगस्त को बेंगलुरु स्थित ISRO मुख्यालय में भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की नौवीं बैठक हुई। इसमें ISRO, NASA और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा अंतरिक्ष सहयोग की समीक्षा की और भविष्य में साझेदारी के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। इसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान, वैज्ञानिक शोध, चंद्रमा की खोज और व्यावसायिक अंतरिक्ष गतिविधियां प्रमुख विषय रहे।

NASA ने ISRO को Moon Base Program में दिया न्योता

इस बैठक के दौरान NASA की ओर से ISRO को Moon Base Program में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया। यह पहल Artemis Accords के तहत चंद्रमा की खोज में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। दोनों पक्षों ने Artemis Framework के तहत वैज्ञानिक डेटा साझा करने और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी भविष्य की परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

NISAR मिशन के बाद मजबूत हुई साझेदारी

भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष साझेदारी में NISAR मिशन को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। NASA और ISRO के संयुक्त NISAR मिशन का उद्देश्य पृथ्वी की सतह में होने वाले बदलावों, प्राकृतिक घटनाओं और पर्यावरणीय गतिविधियों की निगरानी के लिए वैज्ञानिक डेटा जुटाना है। NISAR के बाद दोनों देश अब अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जुड़े अतिरिक्त मिशनों और परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

चंद्रमा से लेकर मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सहयोग

भारत-अमेरिका की बातचीत केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आने वाले समय में दोनों देश चंद्रमा की खोज और मानव को अंतरिक्ष में भेजने से जुड़ी तकनीकों पर भी संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएं तलाश सकते हैं।

भारत-अमेरिका की रणनीतिक टेक्नोलॉजी साझेदारी का हिस्सा

अंतरिक्ष सहयोग को भारत-अमेरिका की व्यापक रणनीतिक तकनीकी साझेदारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को TRUST पहल के तहत आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में ISRO के चेयरमैन और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के सचिव डॉ. वी. नारायणन तथा भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर समेत दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्यों अहम है यह कदम ?

NASA के Moon Base Program में ISRO को शामिल होने का प्रस्ताव भारत के बढ़ते अंतरिक्ष प्रभाव को दर्शाता है। अगर यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो भारत को चंद्रमा की खोज, वैज्ञानिक प्रयोगों और भविष्य की मानव अंतरिक्ष गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का नया अवसर मिल सकता है।भारत पहले ही चंद्रयान मिशनों के जरिए चंद्रमा की खोज में अपनी क्षमता साबित कर चुका है। ऐसे में NASA के साथ बढ़ता सहयोग भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण अगला कदम माना जा रहा है।