नई दिल्ली 12 अगस्त 2026 : अमेरिकी अदालत की ओर से उद्योगपति गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन से जुड़े मामले में कुछ आपराधिक आरोप स्थायी रूप से खारिज किए जाने के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक है। उन्होंने दावा किया कि एक ‘‘समझौता कर चुके प्रधानमंत्री मोदी’’ को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया और देश को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा ?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी अदालत के फैसले से जुड़ी एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा कि मामले में ‘‘जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है’’।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत के हितों से समझौता किया जा रहा है और इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है।
अमेरिकी अदालत ने क्या फैसला दिया ?
अमेरिका की संघीय अदालत ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ मामले में तीन आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज करने की मंजूरी दी है। यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग की कार्रवाई से जुड़ा था। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के जज निकोलस गाराउफिस ने अमेरिकी न्याय विभाग के आरोप खारिज करने के अनुरोध को मंजूरी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने जिन आरोपों को खारिज किया, उनमें शामिल हैं :
प्रतिभूति धोखाधड़ी की साजिश
वायर धोखाधड़ी की साजिश
प्रतिभूति धोखाधड़ी
इन आरोपों को स्थायी रूप से खारिज किए जाने का मतलब है कि इन्हीं आरोपों को दोबारा दर्ज नहीं किया जा सकता।
क्या अदाणी मामले में सभी आरोप खत्म हो गए ?
नहीं। अदालत के आदेश में दो अन्य आरोपों पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इनमें Foreign Corrupt Practices Act (FCPA) के कथित उल्लंघन और न्याय में बाधा डालने की साजिश से जुड़े आरोप शामिल हैं। ये आरोप भारत में रहने वाले पांच सह-आरोपियों से जुड़े बताए गए हैं। इनमें रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल के नाम शामिल हैं। ये आरोपी अब तक अमेरिकी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग को अदालत की निर्धारित शर्तें पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।
क्या अदालत ने अदाणी को आरोपों से बरी कर दिया ?
अदालत के आदेश में इस बिंदु को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। जज निकोलस गाराउफिस ने कहा कि आरोपों को खारिज करना अभियोजन पक्ष के विवेक के तहत लिया गया फैसला है। इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम राय दी है या सरकार के फैसले से सहमति जताई है। यानी आरोप खारिज होना अदालत की ओर से अदाणी को सभी आरोपों में निर्दोष घोषित करने के बराबर नहीं है।
अदाणी ने फैसले का किया स्वागत
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अदाणी ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान जताते हुए फैसले को स्वीकार करने की बात कही। वहीं, भारत में इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठा दिए हैं। दूसरी ओर अमेरिकी अदालत के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि आरोपों को खारिज करने का फैसला अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर आधारित है और इसे आरोपों की सच्चाई पर न्यायिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए।




