नई दिल्ली/ईटानगर, 12 अगस्त 2026 : भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अरुणाचल प्रदेश की पीपुल्स पार्टी (PPA) की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने दावा किया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपर सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग से जुड़े कुछ अहम स्थानों तक पहुंच को प्रभावित किया है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि LAC के आसपास पारंपरिक चरागाह और शिकार वाले इलाकों में चीनी गतिविधियां बढ़ गई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। सूत्रों का साफ-साफ कहना है कि सीमा के स्पष्ट सीमांकन की कमी के कारण दोनों देशों की पेट्रोलिंग टीमें कभी-कभी आमने-सामने आती हैं, जिसे मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत सुलझाया जाता है।

ताक्सिंग में PPA की टीम ने क्या देखा ?

अरुणाचल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मंत्री और PPA के मुख्य सलाहकार काहफा बेंगिया के नेतृत्व में चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने 10 जुलाई को ताक्सिंग क्षेत्र का दौरा किया था। टीम ने स्थानीय नेताओं, बुजुर्गों और क्षेत्र में तैनात सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की। कमेटी ने रिपोर्ट में ‘शेरा 5 पॉइंट’ को लेकर स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया कि 2023 में यहां भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। इसके बाद भारतीय सैनिकों के पीछे हटने और दोबारा उस स्थान पर पेट्रोलिंग नहीं करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद चीनी सैनिकों ने वहां भारतीय सेना से जुड़े पुराने निशान हटा दिए और भारतीय पेट्रोलिंग टीमों की आवाजाही पर रोक लगाई।

‘धीरे-धीरे बढ़ रही चीन की पकड़’, PPA का दावा

PPA की कमेटी ने दावा किया है कि LAC के आसपास चीन की गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। रिपोर्ट में पारंपरिक रूप से स्थानीय समुदायों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले चरागाह और शिकार क्षेत्रों का भी जिक्र किया गया है। कमेटी के मुताबिक, ‘नांगा पहाड़’ इलाके में स्थानीय लोगों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए जाने का दावा किया गया है। PPA का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों से चीनी सैनिकों के लिए इलाके में गतिविधियां बढ़ाना आसान हो सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें PPA की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी के निष्कर्षों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

PLA के दावे पर सुरक्षा सूत्रों ने क्या कहा ?

दूसरी ओर, समाचार एजेंसी ANI ने अरुणाचल प्रदेश के सूत्रों के हवाले से PPA के दावों का खंडन किया है। सूत्रों के मुताबिक, LAC पर सीमांकन पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण दोनों तरफ की पेट्रोलिंग पार्टियां कई बार आमने-सामने आ जाती हैं। इन घटनाओं को मौजूदा व्यवस्था और तय नियमों के तहत सुलझाया जाता है। सूत्रों ने यह भी कहा कि भारतीय सेना और ITBP सीमा पर अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं और चीनी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसलिए, PPA रिपोर्ट में लगाए गए दावों को किसी आधिकारिक सीमा उल्लंघन के प्रमाण के रूप में देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।

क्या है चीन का ‘Five Finger Plan’?

चीन की कथित ‘Five Finger Plan’ या ‘तिब्बत की पांच उंगलियां’ अवधारणा का जिक्र अक्सर भारत और चीन के सीमा विवाद के संदर्भ में किया जाता है। इस अवधारणा में तिब्बत को हथेली और अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, नेपाल, सिक्किम तथा भूटान को पांच उंगलियों के तौर पर बताया जाता है।हालांकि इस सिद्धांत को लेकर ऐतिहासिक और राजनीतिक दावों पर मतभेद हैं। इसे चीन की आधिकारिक वर्तमान सैन्य नीति के रूप में पेश करना भी सावधानी की मांग करता है।

ताइवान से पहले अरुणाचल पर चीन से टकराव की आशंका ?

अरुणाचल को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चीन ताइवान से पहले भारत के साथ सीमा विवाद को बढ़ा सकता है। कुछ विश्लेषकों ने 2027 के आसपास चीन की संभावित सैन्य गतिविधियों को लेकर अनुमान लगाए हैं। हालांकि ऐसी भविष्यवाणियों को लेकर कोई निश्चित आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं है। चीन की रणनीति, ताइवान मुद्दा और भारत-चीन सीमा की स्थिति कई सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक कारकों पर निर्भर करती है।

पूर्व सैन्य अधिकारी ने चीन की तैयारी पर क्या कहा ?

भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी जेएस सोढ़ी के अनुसार चीन के लिए ताइवान अभी भी प्राथमिक रणनीतिक लक्ष्य है। उनका मानना है कि अरुणाचल प्रदेश में किसी बड़े सैन्य अभियान से पहले चीन को अपनी सीमा से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और सैन्य तैयारियों को और मजबूत करना होगा। उन्होंने तिब्बत क्षेत्र में सड़क, रेलवे और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं को चीन की दीर्घकालिक तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम अभी पूरा होना बाकी है।

भारत-चीन सीमा पर आगे क्या ?

अरुणाचल प्रदेश भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवाद का प्रमुख क्षेत्र रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है, जबकि भारत इसे अपने संप्रभु क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है। फिलहाल PPA की रिपोर्ट ने सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है, लेकिन रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। ऐसे में किसी संभावित सैन्य टकराव की भविष्यवाणी के बजाय सीमा पर वास्तविक घटनाक्रम, आधिकारिक बयानों और दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।