नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अलगाव और स्वतंत्रता की मांग को लेकर 11 अगस्त को एक बार फिर गतिविधियां तेज रहीं। बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने इस दिन को ‘Balochistan Independence Day’ के रूप में मनाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने की अपील की। इसी बीच भारत के विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) और बलूचिस्तान से जुड़े सवाल पूछे गए। इसके बाद बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के रुख और भारतीय मीडिया की ओर से बलूचिस्तान के मुद्दे को उठाए जाने की खूब सराहना की। हालांकि यहां एक अहम बात साफ है-भारत ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा अभी नहीं की है।

भारत ने क्या कहा, जिस पर बलूच नेताओं ने जताया आभार?

11 अगस्त को विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और बलूचिस्तान से संबंधित सवाल किए गए थे। बलूच नेताओं ने भारत के उस रुख का स्वागत किया, जिसमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मानवाधिकार और वहां की स्थिति से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की बात सामने आती है। मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर भारत के रुख की सराहना करते हुए भारतीय मीडिया और विदेश मंत्रालय के प्रति आभार जताया।

मीर यार बलूच ने किन देशों से मांगा समर्थन ?

बलूच नेता मीर यार बलूच ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों, अफ्रीकी संघ, आसियान और इस्लामिक सहयोग संगठन समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कथित ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ को समर्थन देने की अपील की। उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत बताने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए। हालांकि, ये मांगें बलूच राष्ट्रवादी नेताओं की हैं और पाकिस्तान तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आधिकारिक स्थिति इससे अलग है।

क्या भारत ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश माना है?

अब तक तो नहीं। भारत की ओर से बलूचिस्तान को स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में मान्यता देने की कोई घोषणा नहीं की गई है। इसलिए बलूच नेताओं की ओर से भारत के बयान या रुख की सराहना को स्वतंत्र बलूचिस्तान को भारत की आधिकारिक मान्यता नहीं माना जाना चाहिए। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी क्षेत्र के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करना और उसे संप्रभु राष्ट्र के तौर पर मान्यता देना दो अलग-अलग बातें हैं।

बलूच नेताओं का क्या दावा है?

बलूच राष्ट्रवादी नेताओं का दावा है कि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों और मानवाधिकारों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्वतंत्र बलूचिस्तान बनने की स्थिति में वहां अपनी सरकार, संविधान, मुद्रा, पासपोर्ट, विदेश नीति, रक्षा व्यवस्था और राजनयिक मिशन स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, इन दावों को पाकिस्तान सरकार स्वीकार नहीं करती। पाकिस्तान बलूचिस्तान को देश का अभिन्न हिस्सा मानता है और सशस्त्र बलूच संगठनों को सुरक्षा के लिए खतरा बताता है।

11 अगस्त को क्यों मनाया जाता Independence Day ?

बलूच राष्ट्रवादी समूह 11 अगस्त की तारीख को 1947 के ऐतिहासिक घटनाक्रम से जोड़ते हैं। उनका दावा है कि ब्रिटिश भारत के विभाजन के दौरान कलात की रियासत की अलग राजनीतिक स्थिति थी।इसी इतिहास को आधार बनाकर बलूच राष्ट्रवादी 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। हालांकि, पाकिस्तान इस ऐतिहासिक दावे और स्वतंत्रता की मांग को स्वीकार नहीं करता।

क्या बलूचिस्तान आजाद हो गया

अब तक नहीं। बलूच नेताओं की ओर से स्वतंत्रता की घोषणा या ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ का दावा किया गया है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में मान्यता नहीं मिली है। फिलहाल बलूचिस्तान पाकिस्तान का एक प्रांत है। इसलिए स्वतंत्रता की घोषणा को वर्तमान स्थिति में एक राजनीतिक और अलगाववादी दावा ही माना जाना चाहिए।

भारत के रुख पर क्यों टिकी हैं निगाहें ?

बलूचिस्तान का मुद्दा पाकिस्तान के लिए लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे में भारत की ओर से पाकिस्तान के भीतर मानवाधिकार और राजनीतिक स्थिति से जुड़े किसी भी बयान को बलूच राष्ट्रवादी समूह अपने पक्ष में महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर पेश करते हैं। वहीं भारत की आधिकारिक स्थिति और बलूच नेताओं की राजनीतिक मांग को अलग-अलग समझना बहुत जरूरी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी चर्चा और समर्थन मिलता है, इस पर नजर रहेगी।