नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026 : मौत की सजा पाए कैदियों को फांसी देने के बजाय किसी दूसरे तरीके से मृत्युदंड देने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष कोर्ट ने मौजूदा याचिका खारिज कर दी है, हालांकि भविष्य में ठोस मेडिकल या वैज्ञानिक प्रमाण सामने आने पर इस मुद्दे की संवैधानिक समीक्षा की संभावना खुली रखी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मौत की सजा देने के लिए फांसी के बजाय किसी दूसरे तरीके को अपनाने की मांग वाली याचिका सिरे से खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका खारिज करने का यह अर्थ नहीं है कि भविष्य में इस मुद्दे पर दोबारा संवैधानिक समीक्षा नहीं हो सकती है। यदि नए और ठोस मेडिकल या वैज्ञानिक सबूत सामने आते हैं, तो मामले पर फिर से विचार किया जा सकता है और इसकी समीक्षा भी हो सकती है।

केंद्र सरकार चाहे तो कर सकती है समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके की व्यापक समीक्षा करना चाहती है और कोई वैकल्पिक तरीका लागू करने पर विचार करती है, तो सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उसके रास्ते में कभी भी बाधा नहीं बनेगा। इससे पहले 22 जनवरी 2026 को शीर्ष अदालत ने मौत की सजा के लिए फांसी के अलावा किसी अन्य तरीके की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

याचिका में फांसी को बताया गया था दर्दनाक तरीका

वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की ओर से दाखिल PIL में मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके को बदलने की मांग की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि फांसी की प्रक्रिया कैदी के लिए लंबे समय तक दर्द और शारीरिक पीड़ा का कारण बन सकती है। याचिका में फांसी के विकल्प के तौर पर घातक इंजेक्शन, गोली मारकर मृत्युदंड, बिजली का झटका और गैस चैंबर जैसे तरीकों का उल्लेख किया गया था।

याचिकाकर्ता ने क्या तर्क दिया ?

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि CrPC की धारा 354(5) में निर्धारित फांसी की प्रक्रिया अमानवीय और क्रूर है। याचिका में यह भी कहा गया कि यह तरीका संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के प्रस्तावों के अनुरूप नहीं है। याचिका में दावा किया गया कि फांसी की प्रक्रिया में व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने में काफी समय लग सकता है, जबकि कुछ वैकल्पिक तरीकों में मृत्यु अपेक्षाकृत कम समय में हो सकती है।

क्या भारत में अब भी फांसी से ही दी जाती है मौत की सजा ?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मौत की सजा देने का मौजूदा कानूनी तरीका फांसी ही बना हुआ है। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए भविष्य में नए वैज्ञानिक या मेडिकल प्रमाणों के आधार पर संवैधानिक समीक्षा की संभावना से इनकार नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब

  • फांसी की जगह दूसरे तरीके की मांग वाली मौजूदा याचिका खारिज।
  • मौत की सजा देने का मौजूदा तरीका बरकरार।
  • नए मेडिकल या वैज्ञानिक प्रमाण मिलने पर भविष्य में समीक्षा संभव।
  • केंद्र सरकार चाहे तो मृत्युदंड देने के तरीके की व्यापक समीक्षा कर सकती है।