विशाखापत्तनम, 21 अगस्त 2026 : आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में देश में बदलते जनसांख्यिकीय आंकड़ों, घटती प्रजनन दर और कुछ क्षेत्रों में आबादी के असंतुलन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बाद में संघ के नेता मुकुंद ने शुक्रवार को बैठक में हुई चर्चाओं की जानकारी साझा की।
आबादी के बदलते आंकड़े बने चर्चा का प्रमुख विषय
RSS नेता मुकुंद के अनुसार, बैठक में कुछ क्षेत्रों में अलग-अलग वर्गों और समुदायों की आबादी में हो रहे बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों की आबादी में वृद्धि देखने को मिल रही है, जबकि कुछ अन्य समुदायों की आबादी में कमी दर्ज की जा रही है। बैठक में इस तरह के जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic Changes) के सामाजिक प्रभाव और उनसे जुड़े संभावित असंतुलन पर विस्तार से विचार किया गया।
घटती प्रजनन दर पर भी हुई चर्चा
बैठक में देश में लगातार घट रही प्रजनन दर (Fertility Rate) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। RSS के मुताबिक, जनसंख्या में बदलाव और घटती प्रजनन दर का समाज की संरचना पर लंबे समय में असर पड़ सकता है। मुकुंद ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में आबादी के बदलाव का असर सामाजिक ताने-बाने और आपसी सद्भाव पर भी दिखाई दे सकता है। इसी संदर्भ में बैठक में इसके संभावित सामाजिक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।
जंतर-मंतर के प्रदर्शनों और व्यवस्था पर भी चर्चा
RSS की समन्वय बैठक में हाल में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुकुंद ने बताया कि प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम में व्यवस्था और सिस्टम की कुछ कमियों पर विचार किया गया। इस बैठक में इन कमियों को दूर करने और व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
युवाओं के भविष्य को लेकर भी मंथन
तीन दिवसीय बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे। RSS के अनुसार, युवाओं की वर्तमान चिंताओं, उनके बेहतर भविष्य और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तार से विचार किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और प्रतिभा का सकारात्मक इस्तेमाल देश के विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए किस तरह किया जा सकता है।
सामाजिक सद्भाव और भविष्य की चुनौतियों पर नजर
बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव, सामाजिक सद्भाव, युवाओं की चिंताओं और व्यवस्था से जुड़े विषयों को व्यापक दृष्टिकोण से देखने पर चर्चा हुई। RSS ने इन मुद्दों को भविष्य की सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों से जोड़कर विचार-विमर्श किया।




