ढाका, 19 अगस्त 2026 : भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिख रहा है। दिसंबर 2026 में 1996 की गंगा जल संधि की अवधि समाप्त होने से पहले बांग्लादेश ने इसके नवीनीकरण को लेकर अपनी शर्त सामने रख दी है। बांग्लादेश सरकार ने नई संधि में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ही ढाका ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह अपने अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख भी कर सकता है। भारत में इसे एक धमकी के रूप में देखा जा रहा है।

गंगा जल संधि में गारंटी क्लॉज की मांग

बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदउद्दीन चौधरी अनी ने कहा कि उनकी सरकार बांग्लादेश के लोगों के हितों और जल अधिकारों की रक्षा करते हुए भारत के साथ गंगा जल बंटवारा समझौते पर दोबारा बातचीत के लिए तैयार है। ढाका में आयोजित एक सेमिनार में बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने कहा कि नई संधि में पानी की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट गारंटी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दे दिया कि यदि द्विपक्षीय बातचीत से इस मामले का समाधान नहीं निकलता है तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने से पीछे नहीं हटेगा।

1996 में हुआ था गंगा जल समझौता

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि पर वर्ष 1996 में हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता फरक्का बैराज के जरिए गंगा के पानी के बंटवारे से जुड़ा है। इसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही है, ऐसे में दोनों देशों के बीच इसके नवीनीकरण को लेकर बातचीत काफी अहम हो गई है। बांग्लादेश का कहना है कि नई संधि में पानी की उपलब्धता को लेकर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अलग-अलग मौसम में उसके हिस्से के पानी पर अनिश्चितता न रहे।

फरक्का बैराज को लेकर भी उठाए सवाल

बांग्लादेशी मंत्री ने फरक्का बैराज को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में लंबे समय से फरक्का बैराज को लेकर असंतोष रहा है। उनका कहना है कि गंगा के पानी से जुड़े फैसलों का असर दोनों देशों के लोगों और कृषि पर पड़ता है। मंत्री ने भारत से बांग्लादेशी लोगों की भावनाओं और हितों को समझने की अपील करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच दोस्ताना संबंध आपसी सम्मान और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने चाहिए।

तीस्ता जल विवाद भी अहम मुद्दा

गंगा के अलावा तीस्ता नदी के पानी का बंटवारा भी भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। तीस्ता सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश पहुंचती है और उत्तरी बांग्लादेश में कृषि व लोगों की आजीविका के लिए बेहद अहम मानी जाती है। भारत में पश्चिम बंगाल के लिए भी तीस्ता का पानी सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से बातचीत के बावजूद व्यापक जल समझौता नहीं हो सका है।

अब आगे क्या होगा ?

गंगा जल संधि की अवधि खत्म होने से पहले भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत का दौर महत्वपूर्ण होगा। बांग्लादेश गारंटी क्लॉज को नई संधि का अहम हिस्सा बनाना चाहता है, जबकि पानी के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के हितों का संतुलन जरूरी होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में गंगा जल संधि का नवीनीकरण, फरक्का बैराज और तीस्ता जल विवाद भारत-बांग्लादेश संबंधों के प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।