नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 : विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 यानी FCRA Amendment Bill को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बनती दिख रही है। कांग्रेस जहां मौजूदा विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं सुप्रिया सुले की NCP (शरद पवार गुट) और शिवसेना (UBT) ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजकर विस्तृत जांच और चर्चा की मांग की है। TMC, DMK और BJD की ओर से भी JPC के जरिए बिल पर विचार किए जाने के संकेत मिले हैं। ऐसे में संसद में FCRA बिल पर विपक्ष की रणनीति को लेकर तस्वीर पहले की तुलना में अलग नजर आ रही है।

FCRA Bill पर कांग्रेस की मांग क्या है ?

कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार से FCRA संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग कर रही है। पार्टी का तर्क है कि मौजूदा स्वरूप में बिल कई गंभीर सवाल खड़े करता है और इसे आगे बढ़ाने से पहले सरकार को विपक्ष तथा संबंधित पक्षों की आपत्तियों पर विचार करना चाहिए। कांग्रेस की ओर से बिल को JPC में भेजने के बजाय इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की जा रही है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच रणनीति को लेकर मतभेद सामने आए हैं।

सुप्रिया सुले ने अपनाया अलग रास्ता

NCP (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा है कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि या तो विधेयक को वापस लिया जाए या फिर इसे JPC के पास भेजा जाए। सुप्रिया सुले ने साफ किया कि उनकी पार्टी मौजूदा स्वरूप में FCRA बिल का समर्थन नहीं करती। हालांकि, उनकी मांग सीधे विरोध तक सीमित न रहकर विधेयक की संसदीय जांच और विस्तृत चर्चा की दिशा में भी है। इसी बीच NCP (SP) के लोकसभा सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की।

उद्धव गुट ने भी कांग्रेस से अलग दिखाया रुख

FCRA बिल पर शिवसेना (UBT) की प्रतिक्रिया भी कांग्रेस के रुख से कुछ अलग दिखाई दी। पार्टी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि FCRA कानून नया नहीं है और इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का प्रस्ताव देशहित में है और विदेशी फंड प्राप्त करने वाले ट्रस्ट या NGO के फंड के स्रोत की जानकारी सुनिश्चित करने से जुड़ा है, तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, शिवसेना ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को बिल का ड्राफ्ट विपक्ष के सामने रखना चाहिए। पार्टी का कहना है कि पूरी जानकारी मिलने और चर्चा के बाद ही समर्थन को लेकर फैसला किया जा सकता है।

‘ड्राफ्ट दिखाइए, फिर समर्थन पर फैसला होगा’

उद्धव गुट की ओर से यह भी कहा गया कि अगर सरकार विपक्ष को भरोसे में लिए बिना या जरूरी जानकारी साझा किए बिना केवल बहुमत के आधार पर विधेयक पारित कराने की कोशिश करती है, तो इसका विरोध किया जाएगा। यानी शिवसेना (UBT) का रुख पूरी तरह विरोध का नहीं, बल्कि बिल की सामग्री और उसके प्रावधानों की जांच के बाद फैसला लेने का नजर आ रहा है।

TMC, DMK और BJD का क्या रुख ?

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC), DMK और BJD की ओर से भी कांग्रेस से अलग रणनीति के संकेत मिले हैं। इन दलों ने JPC के जरिए विधेयक पर चर्चा और समीक्षा की संभावना को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। इससे विपक्ष के भीतर FCRA बिल को लेकर अलग-अलग रणनीतियां सामने आ रही हैं। एक तरफ कांग्रेस बिल की वापसी पर जोर दे रही है, जबकि कुछ विपक्षी दल संसदीय समिति के जरिए इसकी जांच और संशोधन की संभावना तलाश रहे हैं।

12 अगस्त को संसद में आ सकता है FCRA Bill

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार 12 अगस्त को संसद में FCRA संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, मानसून सत्र के बचे दिनों के लिए लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस विधेयक पर चर्चा नहीं हुई। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इसे मौजूदा सत्र में किस रूप में और किस समय आगे बढ़ाएगी।

सरकार ने विपक्ष से JPC पर मांगी राय ?

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने विपक्षी दलों से FCRA बिल को जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने को लेकर राय मांगी है। बताया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल से भी इस संबंध में बातचीत की। हालांकि, कांग्रेस की ओर से बिल को JPC में भेजने के बजाय इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग दोहराई गई है।

मार्च में लोकसभा में पेश हुआ था बिल

Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill 2026 को पिछले सत्र में 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद विपक्षी दलों और कुछ अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से इसके प्रावधानों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। विरोध के कारण बिल पर अब तक विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी है। अब मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार की ओर से इसे आगे बढ़ाने की संभावित कोशिश ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

तमिलनाडु विधानसभा ने भी जताया विरोध

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र से बिल को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने का आग्रह किया गया। विधानसभा में कहा गया कि प्रस्तावित संशोधन से परमार्थ संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक व सामाजिक संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। प्रस्ताव को सदन में ध्वनि मत से पारित किया गया।

अब संसद में क्या होगा ?

FCRA Bill को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि केंद्र सरकार इसे सीधे संसद में आगे बढ़ाएगी या JPC के पास भेजने का रास्ता अपनाएगी। दूसरी ओर, विपक्षी दलों के अलग-अलग रुख से सदन में रणनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं। कांग्रेस की बिल वापसी की मांग, वहीं कुछ विपक्षी दलों की JPC जांच की मांग अब इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र बन गई है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि FCRA संशोधन विधेयक किस रास्ते आगे बढ़ता है।