नई दिल्ली, 19 अग्सत 2026 : एसिड अटैक की कोशिश के मामले में दिल्ली की अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि एसिड फेंकने की कोशिश के दौरान पीड़िता को चोट न लगना अपराध को खत्म नहीं करता। कोर्ट ने तलाकशुदा पत्नी पर एसिड फेंकने की कोशिश करने वाले उसके पूर्व पति सानोज यादव को दोषी ठहराया है। अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज भी कर दिया, जिसमें कहा गया था कि महिला को कोई शारीरिक चोट नहीं लगी, इसलिए अपराध साबित नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि अपराध की कोशिश अपने आप में कानून के दायरे में आती है। इसलिए आरोपित पति दोषी हैं।
महिला ने समय रहते बंद कर लिया था गेट
यह मामला अगस्त 2022 का है। महिला वर्ष 2020 से सानोज यादव से अलग रह रही थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर नशे की हालत में महिला के माता-पिता के घर के बाहर पहुंचा और उस पर पीला तरल पदार्थ फेंकने की कोशिश की। महिला ने खतरा भांपते हुए तुरंत गेट बंद कर लिया और अंदर से कुंडी लगा दी। इसके चलते तरल पदार्थ उसके चेहरे पर नहीं गिरा और फर्श पर जा गिरा। बाद में जांच में उस तरल पदार्थ की एसिड के रूप में पुष्टि हुई।
‘चोट नहीं लगी’ वाली दलील कोर्ट ने की खारिज
अदालत ने कहा कि इस मामले में यह मायने नहीं रखता कि एसिड महिला के शरीर पर गिरा या नहीं। अगर आरोपी ने एसिड फेंकने की कोशिश की थी, तो कानून उस कोशिश को गंभीरता से देखता है।कोर्ट ने महिला की सूझबूझ की भी सराहना की, क्योंकि समय रहते गेट बंद करने से वह संभावित गंभीर चोट से बच गई। अदालत ने घटना से दो दिन पहले महिला की ओर से दर्ज कराई गई लिखित शिकायत को भी महत्वपूर्ण सबूत माना।
कोर्ट ने एसिड अटैक को बताया जेंडर-बेस्ड हिंसा का बर्बर रूप
अदालत ने एसिड अटैक को जेंडर-बेस्ड हिंसा का बर्बर रूप बताया। कोर्ट के मुताबिक, ऐसे हमले सिर्फ शारीरिक दर्द तक सीमित नहीं होते, बल्कि पीड़ित की पहचान और आत्मसम्मान पर भी गहरा असर डाल सकते हैं। अदालत ने कहा कि एसिड हमले के पीड़ितों को लंबे समय तक शारीरिक पीड़ा, भावनात्मक सदमे और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस अधिकारी की पहचान वाली दलील भी खारिज
बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि आरोपी को पकड़ने वाले PCR अधिकारी ने अदालत में उसकी पहचान नहीं की। हालांकि, जज ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारी बड़ी संख्या में संदिग्धों से निपटते हैं और किसी व्यक्ति की पहचान याद रखने में मानवीय भूल हो सकती है।
बच्चों की जरूरतों को अच्छे रिश्ते का सबूत नहीं माना
आरोपी की ओर से यह भी दलील दी गई कि वह बच्चों का ऑटो किराया देता था और उनकी स्कूल से जुड़ी जरूरतें पूरी करता था। इसलिए दोनों के बीच संबंध खराब नहीं थे। अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया। जज ने कहा कि बच्चों की जरूरतों को पूरा करना या आर्थिक सहयोग देना पति-पत्नी के बीच अच्छे संबंध होने का निर्णायक सबूत नहीं है। अदालत ने सानोज यादव को एसिड फेंकने की कोशिश और आपराधिक धमकी के मामले में दोषी ठहराया है। यह फैसला इस बात को स्पष्ट करता है कि गंभीर अपराध को अंजाम देने की कोशिश भी कानून की नजर में महत्वपूर्ण है, भले ही पीड़ित को अंतिम क्षण में शारीरिक चोट से बचा लिया गया हो।




