नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 : प्रशांत महासागर में सक्रिय रहे टाइफून डॉल्फिन ने चीन और जापान के कई इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित कर दिया है। चीन के झेजियांग प्रांत के तटीय इलाकों में तूफान के दौरान हवाओं की रफ्तार करीब 151 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की बात सामने आई। भारी बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। हालांकि टाइफून डॉल्फिन का भारत पर सीधा असर नहीं है, लेकिन मौसम विशेषज्ञ इसकी अप्रत्यक्ष भूमिका पर नजर रख रहे हैं। प्रशांत महासागर में बनने वाली शक्तिशाली मौसम प्रणालियां बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय परिस्थितियों को प्रभावित कर सकती हैं, जिसका असर एशिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है।
चीन में टाइफून डॉल्फिन का असर
टाइफून डॉल्फिन के कारण चीन के पूर्वी हिस्सों में तेज हवाओं और भारी बारिश की स्थिति बनी। झेजियांग के तटीय इलाकों में इसका असर खास तौर पर देखने को मिला। कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हुई और परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अभियान चलाया। शंघाई और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ाई। कई जगह सड़क यातायात प्रभावित हुआ और उड़ानों समेत परिवहन सेवाओं पर असर पड़ा।
जापान के ओकिनावा में भी दिखा असर
चीन पहुंचने से पहले टाइफून डॉल्फिन का असर जापान के दक्षिणी ओकिनावा क्षेत्र में भी देखने को मिला। तेज हवाओं और बारिश के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और परिवहन सेवाओं में व्यवधान आया। हालांकि, जापान में तूफान का प्रभाव चीन के मुकाबले अपेक्षाकृत कम गंभीर रहा। प्रशासन ने खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
क्या भारत के मानसून पर पड़ेगा असर ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय टाइफून डॉल्फिन का भारत के मानसून पर कितना असर पड़ सकता है। फिलहाल इसके सीधे प्रभाव की बात नहीं कही जा सकती। हालांकि, ऐसे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय सिस्टम वायुमंडल में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और नमी का स्थानांतरण करते हैं। इससे एशिया के बड़े हिस्से में वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रशांत में सक्रिय मौसम प्रणालियां कुछ परिस्थितियों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर सकती हैं। यानी प्रशांत क्षेत्र की हर गतिविधि भारत के लिए नुकसानदेह हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ परिस्थितियों में ऐसी गतिविधियां भारतीय मानसून के लिए बारिश की नई प्रणालियां बनने में भी योगदान दे सकती हैं।
किन परिस्थितियों में बढ़ सकती है चिंता ?
मौसम विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय तब बन सकता है, जब प्रशांत महासागर की गतिविधियों के साथ एल नीनो जैसी परिस्थितियां भी प्रभावी हों। ऐसी स्थिति में उष्णकटिबंधीय मौसम प्रणालियों की स्थिति और दिशा में बदलाव भारतीय मानसून के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वैज्ञानिक सिर्फ टाइफून डॉल्फिन के कमजोर होने पर नजर नहीं रख रहे हैं, बल्कि प्रशांत महासागर, बंगाल की खाड़ी और भारतीय महासागर में बनने वाली आगामी मौसम प्रणालियों का भी अध्ययन कर रहे हैं।
फिलहाल भारत के लिए क्या स्थिति है ?
टाइफून डॉल्फिन का भारत में सीधा प्रभाव सामने नहीं आया है। हालांकि, मानसून के दौरान प्रशांत महासागर और हिंद महासागर में होने वाली गतिविधियां मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश के पैटर्न, समुद्री तापमान और बंगाल की खाड़ी में बनने वाली कम दबाव की प्रणालियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टाइफून डॉल्फिन का भारतीय मानसून पर वास्तव में कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है या नहीं।




