नई दिल्ली/मुंबई, 11 अगस्त 2026 : बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाए जाने के दावे के बीच ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एंबेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने पाकिस्तान और बलूचिस्तान के संबंधों को लेकर कई अहम बातें कही हैं। डॉ. परविंदर सिंह के मुताबिक 1947 में भारत की आजादी से पहले बलूचिस्तान ने भी अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। मगर यह संभव नहीं हो सका। उन्होंने दावा किया कि बाद में बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया और इसके बाद से ही वहां पाकिस्तान के खिलाफ विरोध और असंतोष देखने को मिलता रहा है।
बलूचिस्तान के संसाधनों का मुद्दा
डॉ. परविंदर सिंह ने बलूचिस्तान को खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र बताते हुए कहा कि यहां सोना और अन्य महत्वपूर्ण खनिज बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। उनके मुताबिक, इन्हीं संसाधनों की वजह से बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग होता है तो इसका पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को होने वाले संभावित नुकसान से जुड़े 75 प्रतिशत के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
चीन के निवेश को लेकर भी उठाए सवाल
डॉ. परविंदर सिंह ने बलूचिस्तान में चीन और अन्य देशों के निवेश तथा खनिज संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोगों की सहमति के बिना क्षेत्र में बाहरी कंपनियों की गतिविधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष रहा है। उनके अनुसार बलूचिस्तान से खनिजों का निर्यात पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक स्रोत है और इसी कारण पाकिस्तान इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
'आजादी का जश्न मनाने की इजाजत मिलनी चाहिए'
वर्ल्ड पीस यूनाइटेड के एंबेसडर ने कहा कि अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी और स्वतंत्रता का जश्न मनाना चाहते हैं तो उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे विश्व शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई देश बलूचिस्तान की आजादी के समर्थन में हैं। हालांकि इस दावे के समर्थन में कितने और कौन-कौन से देश हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
बलूचिस्तान का मुद्दा क्यों अहम है ?
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। लंबे समय से यहां अलगाववादी आंदोलन और पाकिस्तान सरकार के बीच तनाव बना हुआ है। क्षेत्र में सुरक्षा, संसाधनों के इस्तेमाल, राजनीतिक अधिकारों और स्थानीय लोगों की भागीदारी को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। बलूचिस्तान का मुद्दा केवल पाकिस्तान की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि इसके रणनीतिक और आर्थिक महत्व के कारण चीन समेत कई देशों के हित भी इससे जुड़े हुए हैं।




