नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 : अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के नाम आधिकारिक भारतीय मानचित्र में दर्ज किए जाने को लेकर भारत और चीन के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। चीन ने भारत के इस कदम को अवैध और अमान्य बता दिया है। वहीं, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र प्रताप पांडे ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। देवेंद्र प्रताप पांडे के मुताबिक, भारत ने अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम आधिकारिक तौर पर दर्ज कर चीन को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में इसे एक साहसिक कदम बताया। साथ ही भारत के पक्ष को सही और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक बताया।
'भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया'
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र प्रताप पांडे ने कहा कि भारत का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन भी लंबे समय से अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों के नाम बदलकर उन्हें अपने दावे से जोड़ने की कोशिश करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने इस बार पहले से कदम उठाकर चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ओर से यह संदेश स्पष्ट है कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शी जिनपिंग के भारत आने पर उठाया सवाल
देवेंद्र प्रताप पांडे ने अपने बयान में BRICS शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह कदम सम्मेलन से पहले उठाया गया है और अब देखना होगा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आते हैं या नहीं। हालांकि, शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर उनकी टिप्पणी को एक विशेषज्ञ की राय के तौर पर देखा जाना चाहिए। किसी संभावित यात्रा पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारों की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगा। अब देखना है कि चीन आगे कौन सा कदम उठाता है।
भारत ने 27 स्थानों के नाम किए दर्ज
भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक भारतीय मानचित्र में उनके मानक भारतीय नामों के साथ दर्ज किया है। इनमें सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े स्थान भी शामिल हैं।भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।
चीन ने भारत के कदम को बताया 'अवैध'
भारत के इस कदम पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता और भारत की ओर से स्थानों के नाम बदलने की कोशिश को बीजिंग ने अवैध और अमान्य बताया है। चीन का कहना है कि भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए नए नाम उसके क्षेत्रीय दावे को प्रभावित नहीं कर सकते। दूसरी ओर, भारत लगातार अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को खारिज करता रहा है।
नाम बदलने को लेकर दोनों देशों में पुराना विवाद
अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद नया नहीं है। चीन की ओर से पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए चीनी नाम जारी किए जाते रहे हैं। भारत ने इन दावों को स्वीकार नहीं किया है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर भी कई क्षेत्रों में मतभेद हैं। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम से जुड़े फैसले भारत-चीन संबंधों के व्यापक सीमा विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।




