कानपुर/लखनऊ। करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह सड़क धंसने और दरकने के मामलों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क के धंसने के बाद विशेषज्ञों ने इसे गंभीर और खतरनाक संकेत बताया है।
मिट्टी की गुणवत्ता पर उठे सवाल
विशेषज्ञों के मुताबिक सड़क निर्माण से पहले मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी भार सहने की क्षमता की पर्याप्त जांच नहीं हुई हो सकती है। उनका कहना है कि अगर समस्या सड़क की ऊपरी परत तक सीमित नहीं है, तो सिर्फ ऊपर से मरम्मत करने से एक्सप्रेसवे की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित हिस्सों में यातायात रोककर सड़क की ऊपरी परत हटाई जाए। इसके बाद खराब मिट्टी को निकालकर नई मिट्टी डाली जाए और वैज्ञानिक तकनीक के आधार पर सड़क को दोबारा तैयार किया जाए। स्थिति गंभीर होने पर इस प्रक्रिया में करीब तीन महीने तक यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
23 बार सड़क धंसने की जांच पूरी
इस पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर की टीम ने एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया है। टीम ने सड़क धंसने से जुड़े 23 मामलों की जांच पूरी कर ली है। जांच के दौरान टीम ने अलग-अलग स्थानों से 30 नमूने भी लिए हैं। अब करीब 800 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर NHAI को सौंपे जाने की तैयारी है। इस रिपोर्ट से सड़क धंसने के पीछे की तकनीकी वजहों और निर्माण से जुड़ी संभावित खामियों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सिर्फ मरम्मत से नहीं होगा समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क के बार-बार धंसने की समस्या के पीछे अगर मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी या निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी कोई मूलभूत खामी है, तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे में प्रभावित हिस्सों की गहराई से जांच कर खराब मिट्टी को हटाना और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सड़क का पुनर्निर्माण करना जरूरी हो सकता है।
₹4,200 करोड़ की परियोजना पर बड़ा सवाल
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब ₹4,200 करोड़ खर्च होने के बावजूद सड़क पर इतनी गंभीर खामियां कैसे सामने आईं? IIT खड़गपुर की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सड़क धंसने की असली वजह क्या है और इसके लिए निर्माण की कौन-सी तकनीकी खामी जिम्मेदार है। अब सभी की नजर NHAI को सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट पर है।




