नई दिल्ली, 11 अगस्त 2026 : फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की A320 फ्लाइट में पांच अगस्त को हुए गंभीर टर्बुलेंस मामले की जांच अब और आगे बढ़ गई है। उड़ान के दौरान विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में 17 यात्री घायल हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब इस मामले की जांच में विमान निर्माता कंपनी Airbus और फ्रांस की नागरिक विमानन सुरक्षा जांच एजेंसी Bureau of Inquiry and Analysis for Civil Aviation Safety (BEA) भी शामिल हो रही है। जबकि भारत में जांच का नेतृत्व Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) कर रहा है।

क्या हुआ था Air India की फ्लाइट में ?

फ्लाइट संख्या AI-2379 फुकेट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान विमान को अचानक बेहद तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। इसी दौरान विमान की ऊंचाई में तेजी से बदलाव हुआ और यह करीब 300 फीट नीचे आ गया। घटना के बाद विमान दिल्ली में सुरक्षित उतर गया, लेकिन टर्बुलेंस की वजह से कई यात्री घायल हुए। 17 यात्रियों को अस्पताल ले जाना पड़ा था।

AAIB कर रहा पूरे मामले की जांच

AAIB की जांच में घटना के दौरान विमान की तकनीकी स्थिति और पायलट के संचालन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि विमान अचानक इतनी तेजी से नीचे क्यों आया और उस समय विमान के सिस्टम किस तरह काम कर रहे थे। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर से घटना के दौरान विमान की स्थिति और कॉकपिट में हुई गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

Airbus की टीम भी करेगी तकनीकी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए Airbus अपनी विशेषज्ञ टीम भारत भेज रही है। कंपनी AAIB और एयर इंडिया के साथ मिलकर विमान की तकनीकी जांच में सहायता करेगी। इसके अलावा फ्रांस की BEA भी जांच प्रक्रिया में शामिल होगी। विमान के निर्माता देश की जांच एजेंसी की भागीदारी ऐसे गंभीर विमानन मामलों में तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञता उपलब्ध कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पायलट के व्यवहार की भी हो रही जांच

जांच में पायलट के व्यवहार और उस समय उनकी प्रतिक्रिया को भी शामिल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक घटना के दौरान कॉकपिट में पायलट के प्रभावित होने की बात सामने आई है। पायलट के साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग टेस्ट से जुड़े पहलू की भी जांच की जा रही है। कन्फर्मेटरी टेस्ट का आधिकारिक परिणाम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।

तकनीकी खराबी की संभावना भी जांच के दायरे में

कुछ विमानन विशेषज्ञों ने विमान में कुछ समय के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी तकनीकी समस्या की संभावना जताई है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और इसे दुर्घटना का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। रिपोर्टों के अनुसार, उस दौरान ऑटोपायलट के कुछ समय के लिए डिस्कनेक्ट होने और स्टॉल वार्निंग मिलने की भी बात सामने आई है। विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि घटनाओं का क्रम क्या था।

असली वजह क्या थी, जांच के बाद होगा खुलासा

जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि विमान पहले किसी एयर पॉकेट या अचानक हुए टर्बुलेंस में गया था या किसी तकनीकी समस्या के कारण विमान की ऊंचाई में तेजी से बदलाव हुआ। यह भी देखा जाएगा कि हाइड्रोलिक सिस्टम में कोई अस्थायी खराबी हुई थी या नहीं। एयर इंडिया ने कहा है कि चूंकि मामले की जांच AAIB कर रहा है, इसलिए वह जांच के निष्कर्षों पर टिप्पणी नहीं करेगी। एयरलाइन ने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात कही है। अब फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और विमान की तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 5 अगस्त को AI-2379 में आखिर क्या हुआ था और विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे क्यों आया।