नई दिल्ली, 23 अगस्त। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में आरक्षण व्यवस्था को लेकर हुए प्रदर्शन के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकारों को आरक्षण विरोधी तत्वों को किसी तरह का संरक्षण नहीं देना चाहिए। मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरक्षण को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए, जिससे समानतामूलक समाज बनाने के संवैधानिक प्रयास प्रभावित हों।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर जताई आपत्ति

मायावती की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब 21-22 अगस्त के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ समूहों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव और आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाई, जबकि कुछ प्रदर्शनों में जाति आधारित आरक्षण को खत्म करने की बातें भी सामने आईं।

SC, ST और OBC आरक्षण का किया बचाव

मायावती ने कहा कि संविधान में SC, ST और OBC समाज के लिए आरक्षण की व्यवस्था ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और असमानता को दूर करने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए जातिवाद को खत्म करने पर जोर दिया। उनके मुताबिक आरक्षण को लेकर किसी भी बदलाव का असर संविधान के समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े उद्देश्यों पर नहीं पड़ना चाहिए।

आर्थिक आधार वाली मांग पर क्या बोलीं मायावती?

बसपा प्रमुख ने कहा कि गरीबी दूर करने के लिए सरकारों की ओर से पहले से कई योजनाएं संचालित हैं। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कमियों के कारण इन योजनाओं का पूरा लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था के लाभ को लेकर भी सवाल उठाए।

सरकारों से संरक्षण न देने की अपील

मायावती ने सरकारों से आरक्षण विरोधी गतिविधियों को संरक्षण नहीं देने की अपील की। साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों और लोगों को इस संवेदनशील मुद्दे पर ‘सस्ती राजनीति’ से बचने की सलाह दी। आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस के बीच उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा तेज कर दी है।