पटना, 25 अगस्त 2026 : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ी योजना सामने आई है। करीब 336 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे बक्सर से भागलपुर को जोड़ेगा। इसके बनने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर का समय मौजूदा करीब 8 घंटे से घटकर लगभग 4 से 5 घंटे होने का दावा किया जा रहा है। करीब 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को PPP मॉडल पर विकसित करने की योजना है। एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए वाहन चालकों को टोल देना होगा।

120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी गाड़ियां

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे Access Controlled Greenfield Corridor होगा। यानी इसे नए रास्ते पर विकसित किया जाएगा और सामान्य स्थानीय सड़कों से सीधे प्रवेश की सुविधा नहीं होगी।

इस कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं :

  • करीब 10 निर्धारित एंट्री-एग्जिट पॉइंट होंगे।
  • एक्सप्रेसवे पर सामान्य चौराहे और ट्रैफिक सिग्नल नहीं होंगे।
  • बीच सड़क पर कट और यू-टर्न की व्यवस्था नहीं होगी।
  • इंटरचेंज, फ्लाईओवर और अंडरपास के जरिए कनेक्टिविटी दी जाएगी।
  • प्रस्तावित डिजाइन के मुताबिक वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है।
  • सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर बड़े पुल और एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाए जाने की योजना है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को पश्चिम में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और पूर्व में प्रस्तावित रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा इसे मोकामा-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन अप्रोच रोड, मुंगेर-सबौर गंगा पथ और NH-80 जैसे प्रमुख मार्गों से जोड़ने की योजना बताई गई है। इस कनेक्टिविटी से दिल्ली और लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहनों को पटना शहर के ट्रैफिक से गुजरे बिना बिहार के पूर्वी हिस्सों और आगे बंगाल की ओर जाने में सुविधा मिल सकती है।

भागलपुर से दिल्ली का सफर हो सकता है तेज

भागलपुर से दिल्ली की सड़क दूरी करीब 1,267 किलोमीटर बताई गई है। मौजूदा सड़क मार्ग से इस सफर में लगभग 20 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेसवे और उससे जुड़े दूसरे हाईवे कॉरिडोर तैयार होने के बाद भागलपुर से बक्सर तक करीब 4-5 घंटे में पहुंचने और आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली जाने में समय कम होने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय सड़क की अंतिम डिजाइन, कनेक्टिविटी, गति सीमा और ट्रैफिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

सड़क के किनारे विकसित होंगे आर्थिक केंद्र

सरकार इस परियोजना को सिर्फ परिवहन सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि Economic Corridor के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक गतिविधियों के लिए लैंड बैंक विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही Food Processing Units, Agro-Logistics Parks और Warehousing Hubs जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की संभावना है। इससे भागलपुर के सिल्क उद्योग, मुंगेर के उद्योग और बिहार के विभिन्न इलाकों के कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

पर्यटन को भी मिलेगा फायदा

एक्सप्रेसवे से बिहार के कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। भागलपुर की विक्रमशिला, सुल्तानगंज का अजगैबीनाथ, मुंगेर का चंडिका स्थान और गया-बोधगया जैसे पर्यटन एवं धार्मिक केंद्रों को बेहतर सड़क संपर्क का फायदा मिल सकता है। इसके अलावा बक्सर और उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच भी सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

13 जिलों को मिलेगी कनेक्टिविटी

प्रस्तावित कॉरिडोर बिहार के करीब 13 जिलों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बन सकता है। इसके दायरे में बक्सर, भोजपुर, पटना क्षेत्र, गया, नालंदा, मुंगेर, जमुई और भागलपुर समेत कई जिले बताए गए हैं। परियोजना के पूरा होने पर इन जिलों के बीच आवागमन के साथ-साथ व्यापार, कृषि, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज सड़क संपर्क स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना बन सकता है। दिल्ली-लखनऊ से बिहार के पूर्वी हिस्सों तक बेहतर कनेक्टिविटी के साथ यह कॉरिडोर राज्य में इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स, कृषि और पर्यटन को नई गति देने की क्षमता रखता है। परियोजना की अंतिम लागत, निर्माण समयसीमा और विस्तृत रूट की जानकारी आधिकारिक डीपीआर और सरकारी मंजूरी के अनुसार स्पष्ट होगी।