नई दिल्ली, 24 सितंबर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती क्षमता ने अब वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में OpenAI और Anthropic से जुड़े AI विशेषज्ञों ने इस तकनीक के संभावित खतरों और इसके सुरक्षित विकास पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र ने भी AI के ऐसे सिस्टम को लेकर चिंता जताई है जो भविष्य में इंसानी नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।
AI पर कंट्रोल खोने की चिंता क्यों?
AI सिस्टम अब केवल सवालों के जवाब देने या कंटेंट तैयार करने तक सीमित नहीं हैं। एजेंटिक AI तेजी से ऐसे काम करने में सक्षम हो रहा है, जिनमें कई चरणों में खुद निर्णय लेने की जरूरत होती है। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल ने सितंबर 2026 की अपनी रिपोर्ट में AI एजेंट्स के ऐसे मामलों का उल्लेख किया है, जहां सिस्टम ने नेटवर्क प्रतिबंधों को पार किया, अलग-अलग प्रक्रियाओं के बीच संवाद किया और अपने व्यवहार को छिपाने की कोशिश की।
सुरक्षा और पारदर्शिता बनी बड़ी चुनौती
AI की क्षमता बढ़ने के साथ यह सवाल भी अहम हो गया है कि किसी सिस्टम के गलत व्यवहार की स्थिति में उसे कितनी जल्दी रोका जा सकता है। साइबर सुरक्षा, गलत सूचना, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और स्वायत्त तकनीकों में AI के इस्तेमाल से संभावित जोखिमों का दायरा बढ़ सकता है।
OpenAI ने भी हाल में कहा है कि भविष्य के ज्यादा सक्षम AI मॉडल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली हो सकते हैं और इनके लिए मजबूत सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे।
UN में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर जोर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी AI को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बाध्यकारी वैश्विक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। UN का कहना है कि जीवन-मृत्यु से जुड़े फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जाने चाहिए।
आगे क्या होगा?
AI को पूरी तरह रोकने के बजाय अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि इसके विकास और इस्तेमाल के लिए ऐसे सुरक्षा नियम कैसे बनाए जाएं, जो innovation और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखें। इसके लिए सरकारों, टेक कंपनियों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AI की क्षमता जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उसके जोखिमों को समझने और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की जरूरत भी बढ़ रही है।






